पुजा पाठ

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

भगवान विष्णु या श्री सत्यनारायण पूजा की अनुष्ठान की पूजा आम तौर पर हर महीने के पूर्णिमा के अवसर पर होती है । हिन्दू में कार्तिक, वैसाख, श्रावण और चैत्र के महीने इस अनुष्ठान के लिए आदर्श हैं। यह नए चाँद के दिन या एक संक्रांति पर मनाया जा सकता है- हिंदू माह की शुरुआत या अंत। महालक्ष्मी पूजा हिंदू सत्यनारायण पूजा विष्णु उपवास हिंदुओं का मानना ​​है कि सत्यनारायण या भगवान विष्णु के नाम से बार-बार प्यार के साथ जप करते हुए सत्यनारायण कथा या नैतिक कहानियों को सुनने में एक धार्मिक जीवन का नेतृत्व करने में मदद मिल सकती है।

पूजा वस्तुओं /सत्यनारायण पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • गुग्गल- २०० ग्राम




  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • सत्यनारायण भगवान के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि


  • केला खम्बा -१ बण्डल
  • सुतली -१ बण्डल
  • फुल १ किलो,तुलसी ,
    दुर्वा ,बेलपत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-५००ग्राम ,
    जौ -२५०ग्राम ,हवन सामग्री -५००ग्राम ,
    चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-२किलो
    ,नवग्रह कि लकडी)
  • चोकी -१पाटा -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,
    चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,
    नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

ॐ नम:शिवाय! वंदे देव उमापति सुरगुरु वंदे जगत्कारणम वंदे पन्नगभुषणं म्रुगधरं वंदे पशुनामपति वंदे सूर्यशशांकवन्हि नयनं वंदे मुकुंदंमप्रियम वंदे भक्तजनाश्रय च वरदं वंदे शिवं शंकरम! '

मुंडन कार्य संपन्न हो एक धारणा है कि नवजात शिशु के बालों पिछले जीवन की अवांछित लक्षण की वजह से किया जाता है। इसलिए, नवजात शिशु की बाल अशुद्ध माना जाता है क्योंकि यह भविष्य के जीवन पर पिछले जीवन के नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है । तो, बच्चे की आत्मा को शुद्ध और बच्चे की समृद्ध जीवन सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। यह भी माना जाता है कि मुंडन बच्चे के शरीर का तापमान और बच्चे शांत बनाने को कम कर देता है। रक्त परिसंचरण में सुधार। वेदों के अनुसार, मुंडन एक सुंदर रस्म है। वहाँ सोलह संस्कार या समारोह एक व्यक्ति के जीवन में किया जाता है । मुंडन पूजा भी चूड़ाकर्म संस्कार समारोह में जहां बच्चे के बाल पहली बार काट लिए जाते है । मुंडन पूजा लड़के और लड़कियों दोनों के लिए किया जाता है।

पूजा वस्तुओं /मुंडन पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम



  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये
  • चौकी -१
  • पाटा -२

यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात् । आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्चशुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः । नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम् ..

यज्ञोपवीत संस्कार को उपनयन संस्कार के नाम से भी जाना जाता है। यह संस्कार सोलहों संस्कारों में सबसे विशेष महत्व का है। माता पिता बालक के इस संस्कार के प्रति काफी जागरूक रहते हैं. इस संस्कार के बाद बालक में विद्या बुद्धि के क्षेत्र मे विशेष परिवर्तन दीखता है। उपनयन संस्कार को द्विजातियों के लिए मुख्य संस्कार बतलाया गया है। यज्ञोपवीत संस्कार का अधिकार तीन वर्ण के लोगो को है। ये तीन वर्ण के लोग ब्राम्हण, क्षत्रिय और वैश्य द्विजातीय कहलाते है। तीनो वर्णो के जातकों के उपनयन संस्कार के अलग अलग आयु शास्त्र द्वारा निर्द्धारित की गयी है।

पूजा वस्तुओं /यग्नोपवीत(उपनयन) पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-२नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • घी-१किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर



  • स्टील के लोटे-८
  • मुंज की जनेऊ
  • मृगचर्म
  • पलास का दंड
  • नया पाटा -१
  • नया स्लेट -१
  • खड़ाऊ -१ जोड़ा
  • छाता -१
  • छडी -१
  • भिक्षा का सामान
  • सव्वा पाव लड्डू
  • गूलर की दातुन १२ अंगुल की
  • पीला कपड़ा ढाई मीटर
  • काला तिल -२५०ग्राम
  • जौ -२५०ग्राम
  • हवन पुडा -१५०ग्राम
  • पीतल के टोप-२
  • कांसे की कटोरी -१
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई, बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा (८ -नग )
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये
  • चौकी -१
  • पाटा -२
  • हवन कुंड

हिन्दू वैदिक विवाह हर व्यक्ति के जीवन जहां और आदमी और प्रतिबद्धता और विश्वास का एक जीवन भर के लिए एक महिला को प्रतिज्ञा ले में सबसे महत्वपूर्ण समारोह है। इस विशेष अवसर पर, हम भगवान और देवी से आशीर्वाद लेने के लिए सर्वशक्तिमान और आचरण विवाह अनुष्ठान धन्यवाद। हमारे शास्त्रों का मानना ​​था कि शादी एक साधन हमारे पूर्वजों का शुक्रिया अदा करना है और हमारे लिए परिवार के साथ-साथ आगे हमारे रिवाज और परंपराएं लेने के लिए। विवाह के 7 प्रतिबद्धताओं: - हमेशा परमात्मा याद है। हमेशा सहानुभूति, प्रेम और करुणा के साथ एक दूसरे का इलाज। सभी अच्छे कर्मों में एक दूसरे की मदद। शुद्ध और पुण्य ध्यान रखें। मजबूत और धर्मी हो। माता पिता, भाई, बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए सद्भावना और स्नेह दिखाते हैं। इस तरीके से बच्चों है कि वे मन और शरीर में मजबूत कर रहे लाएँ। हमेशा स्वागत और सम्मान मेहमानों के।

ॐ ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु शशि भूमिसुतो बुधास्च गुरुस्च शुक्रः शनि राहू केतवे सर्वे ग्रह शांति करा भवन्तु - तथास्तु

अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि ‘समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता’। ज्योतिषशास्त्र भी मानता है कि ग्रहों की दशा, ग्रहों की चाल का प्रभाव जातक पर पड़ता है। जातक की जन्मतिथि, जन्म स्थान एवं जन्म के समयानुसार उसकी कुंडली बनती है जिसमें 9 ग्रहों की दशा का विवरण होता है और उसी के अनुसार यह अनुमान लगाया जाता है कि जातक का भविष्य कैसा रहेगा। यदि जातक की कुंडली में किसी प्रकार का ग्रह दोष होता है तो वह उसे प्रभावित करता है। हमारे सौरमंडल में 9 ग्रह यानि सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु माने गये हैं हालांकि राहु व केतु को विज्ञान के अनुसार ग्रह नहीं माना जाता लेकिन ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ये बहुत ही प्रभावशाली ग्रह हैं इन्हें छाया ग्रह की संज्ञा भी दी जाती है। इन सभी ग्रहों के गुणों का समावेश प्रत्येक जातक में मिलता है। यदि किसी जातक का कोई ग्रह कमजोर हो या दशा अनुसार उनका विपरीत प्रभाव जातक पर पड़ रहा हो तो उन्हें शांत करने के उपाय भी ज्योतिषशास्त्र देता है आज आपको इन्ही उपायों के बारे में बतायेंगें और बतायेंगें कि कैसे करें नवग्रहों की पूजा और क्या है नवग्रह पूजन की विधि।

नवग्रह पूजा विधि

नवग्रह-पूजन के लिए सबसे पहले ग्रहों का आह्वान किया जाता है। उसके बाद उनकी स्थापना की जाती है। फिर बाएँ हाथ में अक्षत लेकर मंत्रोच्चारण करते हुए दाएँ हाथ से अक्षत अर्पित करते हुए ग्रहों का आह्वान किया जाता है। इस प्रकार सभी ग्रहों का आह्वान करके उनकी स्थापना की जाती है। इसके उपरांत हाथ में अक्षत लकेर मंत्र उच्चारित करते हुए नवग्रह मंडल में प्रतिष्ठा के लिये अर्पित करें। अब मंत्रोच्चारण करते हुए नवग्रहों की पूजा करें। ध्यान रहे पूजा विधि किसी विद्वान ब्राह्मण से ही संपन्न करवायें। पूजा नवग्रह मंदिर में भी की जा सकती है।

पूजा वस्तुओं / नवग्रह शांती पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-५
  • कलश तांबे के -५
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी- १किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • काला कपड़ा -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • नवग्रहों के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता
  • काला उडद -२५०ग्राम
  • पापड़ -१पॉकेट
  • दीपक छोटे १२,बडे २
  • कमल गट्टा -५०ग्राम


  • गूगल -५०ग्राम
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ ५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,नवग्रह कि लकडी ,इट -२१,मिट्टी या बालू , टोप पीतल के २,थाली १,कटोरी २,कांसे की कटोरी १,बांस की छाबडी १ )
  • पाटा -२,चोकी -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

महा-लक्ष्मि नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि । हरि-प्रिये नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं दया-निधे ॥

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

दीवाली पर, अमावस्या के दिन के दौरान, भगवान गणेश और श्री लक्ष्मी की नव स्थापित मूर्तियों की पूजा की जाती। इसके अलावा लक्ष्मी-गणेश पूजा, कुबेर पूजा और बाहिया-खाता पूजा (बही-खाता पूजा) से भी किया जाता है। दीवाली पूजा के दिन महालक्ष्मी का पूजन करने से पूरा वर्ष शुभ होता है

पूजा वस्तुओं / दीपावली पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२नग
  • कलश तांबे के -२
  • तांबडी -२
  • रोली -५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-७-नग
  • चांदी के दो शिक्के कलश मे डालने के लिये
  • इत्र-२ शीशी
  • पीली सरसो-२० ग्राम
  • गुड पावकिलो
  • दोना -१गड्डी
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • लक्ष्मी गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता ,साडी ,ब्लाऊज
  • शृंगार सामग्री :



  • पंचमेवा -२५०ग्राम
  • सुपाडी-३१नग
  • लौग-२५ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -आधा किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • मधु १शीशी
  • कच्चा दुध -१००ग्राम
  • दही -१००ग्राम
  • घी-अधा किलो
  • मीठा तेल -अधाकिलो
  • अगरबत्ती
  • कापुस
  • माचीस
  • पूजा का पान
  • धान कि खिल-१००ग्राम
  • बतासा-२५० ग्राम
  • नारिअल सुखा गोला
  • धनिया आखि-५० ग्राम
  • हळदी कि गांठ-११नग
  • कमल गठ्ठा -२१नग


  • मिट्टी के दीपक छोटे २१,बडे २
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • लक्ष्मी गणेश जी की बडी फोटो
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चोकी -२,पाटा -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,
    आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नम: शिवायः ॥

महारुद्र शब्द का शाब्दिक अर्थ है – स्नान करना अथवा कराना। महारुद्र का अर्थ है भगवान रुद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रुद्र के मंत्रों के द्वारा अभिषेक करना। यह पवित्र-स्नान महारुद्र शिव को कराया जाता है। वर्तमान समय में महारुद्र के रुप में ही विश्रुत है। अभिषेक के कई रूप तथा प्रकार होते हैं। शिव जी को प्रसंन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है महारुद्र श्रेष्ठ ब्राह्मण विद्वानों के द्वारा कराना कराना चाहिए वहीं महारुद्र के ग्यारह आवृति पाठ को महारुद्र तो महारुद्र के ग्यारह आवृति पाठ को अतिरुद्र कहा जाता है। रुद्र पूजा के इन्हीं रुपों को कहता है यह श्लोक-महत: परित: प्रसर्पतस्तमसो दर्शनभेदिनो भिदे। दिननाथ इव स्वतेजसा हृदयव्योम्नि मनागुदेहि न:॥

पूजा वस्तुओं /महारुद्र अभिषेक पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-७ नग
  • रोली-१००ग्राम
  • अबीर-१००ग्राम
  • गुलाल-१००ग्राम
  • सिन्दूर-१००ग्राम
  • पीसी हल्दी-१००ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-१किलो
  • लौग-१००ग्राम
  • इलायची-१००ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • कच्चा दुध -११ लीटर
  • दही -५००ग्राम
  • घी-२ किलो
  • गंगाजल-१ शीशी
  • गुलाबजल
  • गुग्गल- २०० ग्राम
  • काला उडद-२००ग्राम
  • पापड-१ पैकेट
  • कमल गट्टा -१००ग्राम



  • भस्म
  • नारियल पानी
  • गन्ने का रस
  • कलश ५ तांबे के
  • मौसम्बी का ज्युस
  • चांदी का वर्क
  • भांग
  • पंचमेवा -१ किलो
  • लाल कपडा
  • पिला कपडा
  • सफेद कपडा
  • हरा कपडा
  • काला कपड़ा
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर -१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-५ किलो
  • गेंहु -१ किलो
  • शक्कर -१ किलो
  • शहद -१ शीशी
  • कलर(लाल ,पीला हरा ,कला)


  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ -५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,नवग्रह कि लकडी ,
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,आसन,
  • देवतांओ के लिये:धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,साडी,ब्लाउज
  • शृंगार सामग्री
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र १००८
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ३,पाटा ४

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:, पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

यजुर्वेद के इस शांति पाठ मंत्र के जरिये साधक ईश्वर से शांति बनाये रखने की प्रार्थना करता है। विशेषकर हिंदू संप्रदाय के लोग अपने किसी भी प्रकार के धार्मिक कृत्य, संस्कार, यज्ञ आदि के आरंभ और अंत में इस शांति पाठ के मंत्रों का मंत्रोच्चारण करते हैं। वैसे तो इस मंत्र के जरिये कुल मिलाकर जगत के समस्त जीवों, वनस्पतियों और प्रकृति में शांति बनी रहे इसकी प्रार्थना की गई है। इसका शाब्दिक अर्थ लें तो उसके अनुसार इसमें यह गया है कि हे परमात्मा स्वरुप शांति कीजिये, वायु में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हों, जल में शांति हो, औषध में शांति हो, वनस्पतियों में शांति हो, विश्व में शांति हो, सभी देवतागणों में शांति हो, ब्रह्म में शांति हो, सब में शांति हो, चारों और शांति हो, हे परमपिता परमेश्वर शांति हो, शांति हो, शांति हो।

पूजा वस्तुओं /शांतिपाठ पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम



  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी -१
  • पाटा -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,
    गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,
    पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

हिंदू कैलेंडर के श्रवण, कार्तिक, मार्जशीर और पौष का महीना भूमि के पूजन के लिए सबसे उपयुक्त समय है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले भूमि की पूजा करना आवश्यक है। पूजा के लिए समय का चयन करते समय सावधान रहें। सोमवार और गुरुवार पूजा के लिए सबसे अच्छा दिन साबित होते हैं। किसी को भी अछिक मास, शून्य महीना, चंद्रमा माह और सूर्यास्त से बचना चाहिए। भूतपूर्व पूजा के लिए सख़्त अनुपालन में पृथ्वी पूजन समारोह आयोजित किया जाता है। इस पूजा से, एक सकारात्मक ऊर्जा और साइट के आस-पास के प्राकृतिक तत्वों को खुश कर सकता है। एक सही समय वास्तु मुहूर्त के अनुसार चुना जाता है, जिस समय वास्तू पुरूष अपनी पूर्ण ताकत में होता है

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा ! यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यांतर: शुचिः !! अतिनिलघनश्यामं नलिनायतलोचनं ! स्मरामि पुण्डरीकाक्षं तेन स्नातो भवाम्यहम !!

भूखंड पर भवन निर्माण के लिए नींव की खुदाई और शिलान्यास शुभ मुहूर्त में किया जाना चाहिए। शिलान्यास का अर्थ है शिला का न्यास अर्थात् गृह कार्य निर्माण प्रारम्भ करने से पुर्व उचित मुहूर्त में खुदाई कार्य करवाना। यदि मुहूर्त सही हो तो भवन का निर्माण शीघ्र और बिना रुकावट के पूरा होता है। शिलान्यास के लिए उपयुक्त स्थान पर नींव के लिए खोदी गई खात (गड्ढे) में पूजन एवम् अनुष्ठान पूर्वक पांच शिलाओं को स्थापित किया जाता है।

पूजा वस्तुओं /भवननिर्माण पूजा सामग्री

  • नारियल -१५
  • रोली-२००ग्राम
  • अबीर-२००ग्राम
  • गुलाल-२००ग्राम
  • सिंदूर-१००ग्राम
  • हल्दी -१००ग्राम
  • सरसो-२००ग्राम
  • कपूर-१००ग्राम
  • केशर
  • शकर-१किलो
  • गुड -१किलो
  • काला उडद -आधा किलो
  • यज्ञोपवीत-१ बंडल
  • इत्र की शीशी
  • मौली-४
  • पंचमेवा-१किलो
  • चांदी के सिक्के -७(१०ग्राम के )
  • सोने के टूकडे -७
  • नारियल गट -१
  • मधु-१ शीशी
  • चावल-५किलो
  • गेहू -१किलो
  • पंचरत्न -७पुडीया
  • सर्वोषधी
  • सप्तधान्य
  • सप्तमृतिका
  • सुपारी-१किलो
  • मुंग की दाल -१किलो
  • तुवर की दाल -१किलो
  • उड़द की दाल -१किलो
  • मसूर की दाल -१किलो
  • धुप -२पॉकेट
  • चंदनपावडर -१००ग्राम
  • चने की दाल -१किलो


  • लौग-५०ग्राम
  • इलाईची-५०ग्राम
  • कापुस
  • अगरबत्ती
  • माचीस
  • शुद्ध घी-२किलो
  • सरसो का तेल-अधाकिलो
  • धान कि लाई
  • तालाब कि खज्जी
  • पारा
  • दर्भ
  • वास्तू मुर्ती
  • हवन कि लकडी-२किलो
  • दही -आधा किलो
  • दूध-१ लीटर
  • कछुआ की मुर्ती
  • चांदी का सर्प
  • गंगाजल
  • गुलाब जल
  • गोबर
  • लोहे कि सलिया १ फिट
  • दोना २ बण्डल
  • तांबे के लोटे-७
  • तांबडी -७
  • पीतल कि कटोरी २
  • टोप २
  • पीतल की थाली -१
  • काला तिल -१किलो
  • चावल रंगनेका कलर -(लाल ,हरा ,पिला ,काला )
  • पापड-१ पैकेट
  • गुग्गल- २०० ग्राम
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • हवन पुडीया -१किलो
  • जौ ५०० ग्राम

  • लोहवान -१००ग्राम
  • नवग्रह समीधा
  • मिट्टी के दीपक -छोटे १५ बडे २
  • सिमेंट
  • गैती
  • फावड़ा
  • कन्नी
  • मिट्टी के कलश -४
  • लाल कपडा २मीटर ,सफेद कपडा ५ मीटर ,पिला कपडा २ मीटर ,
    काला कपडा १ मीटर,हरा कपड़ा -सव्वा मीटर
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ५ ,कुर्ता ५ ,तौलिया ५ ,बनियान ५ ,रुमाल ५ , आसन ५,माला ५
  • देवतांओ के लिये:धोती ५ ,कुर्ता ५ ,तौलिया ५ ,बनियान ५ ,रुमाल ५ बडी,साडी ३,ब्लाउज ३
  • शृंगार सामग्री :
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार ,केला का खंबा २ बण्डल
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,
    मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

नमस्ते वास्तु पुरुषाय भूशय्या भिरत प्रभो | मद्गृहं धन धान्यादि समृद्धं कुरु सर्वदा ||

ॐ वास्तोष्पते प्रति जानीद्यस्मान स्वावेशो अनमी वो भवान यत्वे महे प्रतितन्नो जुषस्व शन्नो भव द्विपदे शं चतुष्प्दे स्वाहा |

नए घर के पूजा को वास्तु शांति गृह प्रवेश पूजा कहा जाता है। पहली बार नए घर में प्रवेश करने से पहले यह पूजा की जाती है। घर में जाने के लिए शुभ मुहूर्त का निर्धारण करने के लिए एक पंडित की सहायता लेना चाहिए। पंडित को ज्योतिषीय चार्ट और पंचांग की मदद से मुहूर्त का निर्धारण करना चाहिए । प्राचीन वैदिक ग्रंथों में वर्णित तीन प्रकार के गृह प्रवेश हैं, जो अपप्रोवा, सपुर और द्वांदवा हैं। अप्रोवा को नए भवन के घर में पहली बार प्रवेश के दौरान किया जाता है। इसे नए गृह प्रावेश भी कहा जाता है। पहले से निर्मित घर में दाखिल होने के दौरान सपुरुर गृह प्रवेश किया जाता है। जब परिवार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है तो यह पूजा की जाती है। ऑनलाइन करने के लिए पंडितजी ऑनलाइन और सामग्री के साथ गृह प्रवेश बुक कर सकते हैं।

पूजा वस्तुओं /गृह प्रवेश पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-१०
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-१ किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • कालीमिर्च-१०० ग्राम
  • गुग्गल- २०० ग्राम



  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-७किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -१ किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -एक लीटर
  • दही -२००ग्राम
  • घी-३ किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • चावल रंगनेका कलर -(लाल ,हरा ,पिला ,काला )
  • पापड-१ पैकेट
  • काला उडद-२००ग्राम
  • धनिया आखी -५०ग्राम
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • हरी मुंग -१००ग्राम
  • पंचमेवा -१ किलो


  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ -५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,नवग्रह कि लकडी ,इट -२१,मिट्टी या बालू ,कलश तांबे का -७ ,तांबडी ५ टोप पीतल के २,थाली १,कटोरी २,कांसे की कटोरी १,बांस की छाबडी १ )
  • लाल कपडा २मीटर ,सफेद कपडा ५ मीटर ,पिला कपडा २ मीटर ,काला कपडा १ मीटर,हरा कपड़ा -सव्वा मीटर
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ५ ,कुर्ता ५ ,तौलिया ५ ,बनियान ५ ,रुमाल ५ , आसन ५,माला ५
  • देवतांओ के लिये:धोती ५ ,कुर्ता ५ ,तौलिया ५ ,बनियान ५ ,रुमाल ५ बडी,साडी ३,ब्लाउज ३
  • शृंगार सामग्री :लोहे कि किल ४,वास्तू की मूर्ती १,चांदी के सिक्के ५,सोने का तार १,मिट्टी के कलश २,मिट्टी के दीपक छोटे १२,बडे २
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार ,केला का खंबा २ बण्डल
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गजकर्णकः । लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः । धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः । द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि । विद्यारंभे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा । संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ॥

सखा सप्तपदा भव । सखायौ सप्तपदा बभूव । सख्यं ते गमेयम् । सख्यात् ते मायोषम् । सख्यान्मे मयोष्ठाः ।

विजयपांडितजी डॉट कॉम आपको शादी / विवाह के लिए उचित मूल्य पर पंडित जी प्रदान करते है। हिन्दू वैदिक विवाह हर व्यक्ति के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण समारोह है जहां पुरुष और स्त्री प्रतिबद्धता और विश्वास के जीवनकाल के प्रति वचन लेते हैं। इस विशेष अवसर पर, हम भगवान और देवताओं से आशीर्वाद लेने के लिए भगवान की आराधना करते हैं और विवाह की पूजा करते हैं। हमारे शास्त्रों का मानना ​​है कि शादी हमारे पूर्वजों का शुक्रिया अदा करने के लिए एक साधन है और परिवार को जारी रखने के लिए हमारे रिवाजों और परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए है।

7 विवाह के प्रतिबद्धता: - हमेशा दिव्य याद रखें। हमेशा सहानुभूति, प्रेम और करुणा के साथ एक दूसरे के साथ व्यवहार करें सभी अच्छे कर्मों में एक-दूसरे की सहायता करें शुद्ध और धार्मिक ध्यान रखें मजबूत और धर्मी बनें माता-पिता, भाइयों, बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों को सद्भावना और स्नेह दिखाएं बच्चों को ऐसे तरीके से लाएं कि वे मन और शरीर में मजबूत हों। हमेशा मेहमानों के स्वागत और सम्मान करें.हमारे यहाँ संगीत मे मारवाड़ी -गुजराती -उत्तरभारतीय विवाह कराये जाते हैं

पूजा वस्तुओं /विवाह पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-१० नग
  • मोली-२ बंडल
  • अबीर-५०ग्राम
  • गुलाल-५०ग्राम
  • सिन्दूर-५०ग्राम
  • मेहंदी-५०ग्राम
  • पीली सरसो-५०ग्राम
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौंग-५०ग्राम
  • इलायची -५०ग्राम
  • जनेऊ-१० नग
  • अगरबत्ती
  • कापुस
  • माचीस
  • दही
  • कच्चा दुध
  • पंचमेवा
  • शक्कर
  • शहद
  • घी २किलो
  • सर्वोसधी
  • चावल-२किलो
  • गेंहू -१किलो
  • पत्तल
  • दोना -२गड्डी
  • कांशे की कटोरी-४
  • तांबे के कलश-२
  • पूर्ण पात्र का टोपिया- ३



  • तांमडी-२
  • कटोरी पीतल कि-२
  • थाली पीतल कि -१
  • शंख
  • पर्वत फल (१लोढी़)
  • सुर्प
  • हळदी पीसी हुई
  • कच्चा सूत
  • मिट्टी के कलश -५
  • मिट्टी के बडे दीपक -८
  • मिट्टी के छोटे दीपक -१०
  • हवनकुंड
  • बालू या मिट्टी
  • काठ की खुंटी -४
  • कच्चा बासदाण्डा-४
  • हवन कि लकडी-१किलो
  • गंगाजल
  • पंचरत्न
  • सोने की टीकडी -१
  • चांदी के सिक्के -२
  • गणेश जी के लिये वस्त्र :धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :-५वस्र
  • माताजी के लिये:साडी,ब्लाउज,शृंगार सामग्री
  • आचार्य वरण सामग्री :-५वस्र
  • लाल कपडा -दो मीटर
  • सफेद कपडा -दो मीटर
  • पिला कपडा -दो मीटर
  • समीपत्र
  • चावल कि खील


  • नारीयल का गट
  • नारीयल की बाटी
  • चन्दन
  • केशर
  • कपुर
  • रोली
  • बांध साकडी के सामान
  • गणेश जी का चित्र
  • आम का पत्ता
  • फुल छूट्ट एक किलो
  • हार दो बडे साईझ के
  • हार दो वर वधू के लिये
  • दुर्वा दो जुडी
  • तुलसी के पत्ते
  • पान पत्ता -५१
  • फळ -५प्रकार के
  • पेडा/लड्डू
  • गोबर कि कंडी
  • पाटा,चौकी
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

ॐ गजाननं भूतगणादि सेवितंकपित्थ जम्बूफलचारु भच्छणम उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥

किसी भी पूजा में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह शुभ भाग्य के रूप में माना जाता है; कोई नया काम शुरू करने से पहले गणेश जी के लिए पहली बार प्रार्थना करें। भगवान गणेश का अन्य नाम 'विघ्नहर्ता ' या 'विनायका'है का अर्थ है कि वह सभी बाधाओं को हटा देंगे । गणेशजी को ज्ञान के भगवान के रूप में भी मापा जाता है। विश्वास के अनुसार, कोई ज्ञान प्राप्त कर सकता है और समझने में बहुत बुद्धिमान बन सकता है कि क्या अच्छा है और क्या नहीं है, जब वह भगवान गणेश को ईमानदारी से प्रार्थना करता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, किसी भी नए काम या किसी भी पूजा शुरू करने से पहले, अच्छे परिणाम के लिए गणपती जी का पुजन करना चाहिये मंत्र:श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥

पूजा वस्तुओं / गणपती पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम



  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी -१
  • पाटा -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य । प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य ॥१॥

देवी गौरी की पूजा कन्या विवाह के पहले अखंड सौभाग्य प्राप्त करने हेतु गौरी पूजन कर ने मंदिर में जाती है अविवाहित लड़कियां उसकी पूजा करती हैं। इस दिन को अवहार के रूप में जाना जाता है

पूजा वस्तुओं / गौरी पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • रोली
  • अबीर
  • गुलाल
  • सिन्दूर
  • पीसी हल्दी
  • कपुर
  • मोली
  • इत्र
  • सुपाडी
  • लौग
  • इलायची
  • अगरबत्ती



  • कापुस
  • माचिस,दोना
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१००ग्राम
  • शक्कर
  • शहद
  • कच्चा दुध
  • दही
  • घी
  • पंचमेवा
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर


  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • पान का पत्ता
  • फुल माला
  • फुल ,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

"महामृत्युंजय मंत्र" भगवान शिव का सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस मंत्र को प्राण रक्षक और महामोक्ष मंत्र कहा जाता है। मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjay Mantra) से शिवजी को प्रसन्न करने वाले जातक से मृत्यु भी डरती है। इस मंत्र को सिद्ध करने वाला जातक निश्चित ही मोक्ष को प्राप्त करता है। यह मंत्र ऋषि मार्कंडेय द्वारा सबसे पहले पाया गया था।

हम तीन नेत्र वाले भगवान शंकर की पूजा करते हैं जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि जिस प्रकार एक ककड़ी अपनी बेल में पक जाने के उपरांत उस बेल-रूपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है, उसी प्रकार हम भी इस संसार-रूपी बेल में पक जाने के उपरांत जन्म-मृत्यु के बंधनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं तथा आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्यागकर आप ही में लीन हो जाएं और मोक्ष प्राप्त कर लें।

यह मंत्र व्यक्ति को ना ही केवल मृत्यु भय से मुक्ति दिला सकता है बल्कि उसकी अटल मृत्यु को भी टाल सकता है। कहा जाता है कि इस मंत्र का सवा लाख बार निरंतर जप करने से किसी भी बीमारी तथा अनिष्टकारी ग्रहों के दुष्प्रभाव को खत्म किया जा सकता है। इस मंत्र के जाप से आत्मा के कर्म शुद्ध हो जाते हैं और आयु और यश की प्राप्ति होती है। साथ ही यह मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।

पूजा वस्तुओं /महामृत्युंजय पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-७नग
  • रोली-२५ग्राम
  • अबीर-२५ग्राम
  • गुलाल-२५ग्राम
  • सिन्दूर-२५ग्राम
  • पीसी हल्दी-२५ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-पाव किलो
  • लौग-२५ग्राम
  • इलायची-२५ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • कच्चा दुध -५ लीटर
  • दही -२००ग्राम
  • घी-२ किलो



  • गंगाजल-१ शीशी
  • गुलाबजल
  • भस्म
  • नारियल पानी
  • गन्ने का रस
  • मौसम्बी का ज्युस
  • चांदी का वर्क
  • भांग
  • पंचमेवा -१००ग्राम
  • लाल कपडा
  • पिला कपडा
  • सफेद कपडा
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर -१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-५ किलो
  • गेंहु -१ किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • शहद -१ शीशी
  • कलर (लाल,हरा ,पिला ,काला )
  • गुग्गल- २०० ग्राम
  • काला उडद-२००ग्राम
  • पापड-१ पैकेट
  • कमल गट्टा -१००ग्राम


  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ -५००ग्राम ,
    हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,
    नवग्रह कि लकडी ,इट -२१,मिट्टी या बालू ,
    कलश तांबे का -७ ,तांबडी ५ टोप पीतल के २,थाली १,कटोरी २,कांसे की कटोरी १,बांस की छाबडी १ )
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,आसन,जपमाला,पंचपात्र
  • देवतांओ के लिये:धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,साडी,ब्लाउज
  • शृंगार सामग्री
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र १००८
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ३,पाटा ४

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।। कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय। सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।

रुद्र अभिषेका रुद्र रूप में भगवान शिव की पूजा का एक अनुष्ठान है। इस पद्धति में, शिव लिंग पानी या दूध से अभिषेक किया जाता है सभी वैदिक ग्रंथों में रुद्र अभिषेक पूजा को सबसे बड़ी आध्यात्मिक पूजा माना जाता है। अभिषेक एक अनुष्ठान है, जिसे आप भगवान की पूजा करते हैं जैसे कि दूध (गाय का दूध), घी, दही, शहद, नारियल का पानी, चावल, पानी, गन्ना का रस, पाउडर चीनी और कई अन्य समान वस्तुएं जैसे पंडितों द्वारा सलाह दी जाती है। पूजा में इस्तेमाल किए गए ये आध्यात्मिक वस्तुएँ आम तौर पर उन वस्तुओं को दी जाती हैं, जिन्हें भगवान शिव ने पसंद किया है।

पूजा वस्तुओं /रुद्र अभिषेक पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२नग
  • रोली-२५ग्राम
  • अबीर-२५ग्राम
  • गुलाल-२५ग्राम
  • सिन्दूर-२५ग्राम
  • पीसी हल्दी-२५ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-पाव किलो
  • लौग-२५ग्राम
  • इलायची-२५ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • कच्चा दुध -५ लीटर
  • दही -२००ग्राम
  • घी-अधा किलो



  • गंगाजल-१ शीशी
  • गुलाबजल
  • भस्म
  • नारियल पानी
  • गन्ने का रस
  • कलश २ तांबे के
  • मौसम्बी का ज्युस
  • चांदी का वर्क
  • भांग
  • पंचमेवा -१००ग्राम
  • लाल कपडा
  • पिला कपडा
  • सफेद कपडा
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर -१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१ किलो
  • गेंहु -१ किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • शहद -१ शीशी


  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,आसन,
  • देवतांओ के लिये:धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,साडी,ब्लाउज
  • शृंगार सामग्री
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र १००८
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ३,पाटा ४

देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि

कुबेर मं‍त्र : ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधि पतये धनधान्य समृद्धि में देहि दापय दापय स्वाहा।।

धनतेरस का त्योहार दिवाली त्योहार से दो दिन पहले मनाया जाता है। लोग इस त्योहार को महान उत्साह, भक्ति और समृद्धि के साथ मनाते हैं। यह त्यौहार महाराष्ट्र, उत्तरी भारत और गुजरात में मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान धन्वंतरी को समर्पित है जो सभी देवताओं के वैद्य है। इस दिन पर किया जा रहा महत्वपूर्ण अनुष्ठान लक्ष्मी पूजा शाम को किया जाता है। इस दिन कुबेरजी का विशेष पूजन किया जाता है , इस तरह से इस त्योहार को मनाया जाता है, इस दिन लोग सोने या चांदी की चीजें खरीदते हैं या खरीदारी करते हैं। इस दिन को सभी नई खरीद या निवेश के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है। इस दिन लोगों ने दिवाली त्योहार के पहले दीपक लगाया जाता है ।।

पूजा वस्तुओं /धनतेरसपूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२नग
  • कलश तांबे के -२
  • तांबडी -२
  • रोली -५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-७-नग
  • चांदी के दो शिक्के कलश मे डालने के लिये
  • इत्र-२ शीशी
  • पीली सरसो-२० ग्राम
  • गुड पावकिलो
  • दोना -१गड्डी
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • लक्ष्मी गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता ,साडी ,ब्लाऊज
  • शृंगार सामग्री
  • कपूर
  • चन्दन पावडर



  • पंचमेवा -२५०ग्राम
  • सुपाडी-३१नग
  • लौग-२५ग्राम
  • इलायची-२५ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -आधा किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • मधु १शीशी
  • कच्चा दुध -१००ग्राम
  • दही -१००ग्राम
  • घी-अधा किलो
  • मीठा तेल -अधाकिलो
  • अगरबत्ती
  • कापुस
  • माचीस
  • पूजा का पान
  • धान कि खिल-१००ग्राम
  • बतासा-२५० ग्राम
  • नारिअल सुखा गोला
  • धनिया आखि-५० ग्राम
  • हळदी कि गांठ-११नग
  • कमल गठ्ठा -२१नग


  • रुई ,बत्ती -१पॅकेट
  • लक्ष्मी गणेश जी की बडी फोटो
  • :मिट्टी के दीपक छोटे २१,बडे २
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चोकी -२,पाटा -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,
    आसन , चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

समुद्रवसने देवी पर्वतस्तनमंडीते ! विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्वमे !!

हिंदू कैलेंडर के श्रवण, कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष का महीना भूमि के पूजन के लिए सबसे उपयुक्त समय है। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले भूमि की पूजा करना आवश्यक है। पूजा के लिए समय का चयन करते समय सावधान रहें। सोमवार और गुरुवार पूजा के लिए सबसे अच्छा दिन साबित होते हैं। किसी को भी अधिक मास, शून्य महीना, चंद्रमा माह और सूर्यास्त से बचना चाहिए। इस पूजा से, एक सकारात्मक ऊर्जा और साइट के आस-पास के प्राकृतिक तत्वों को खुश कर सकता है। एक सही समय वास्तु मुहूर्त के अनुसार चुना जाता है, जिस समय वास्तू पुरूष अपनी पूर्ण ताकत में होता है

पूजा वस्तुओं /भूमि पूजा सामग्री

  • नारियल -१५
  • रोली-२००ग्राम
  • अबीर-२००ग्राम
  • गुलाल-२००ग्राम
  • सिंदूर-१००ग्राम
  • हल्दी -१००ग्राम
  • सरसो-२००ग्राम
  • कपूर-१००ग्राम
  • केशर
  • शकर-१किलो
  • गुड -१किलो
  • काला उडद -आधा किलो
  • यज्ञोपवीत-१ बंडल
  • इत्र की शीशी
  • मौली-४
  • पंचमेवा-१किलो
  • चांदी के सिक्के -७(१०ग्राम के )
  • सोने के टूकडे -७
  • नारियल गट -१
  • मधु-१ शीशी
  • चावल-५किलो
  • गेहू -१किलो
  • पंचरत्न -७पुडीया
  • सर्वोषधी
  • चावल रंगनेका कलर -(लाल ,हरा ,पिला ,काला )
  • पापड-१ पैकेट
  • गुग्गल- २०० ग्राम
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • हवन पुडीया -१किलो
  • जौ ५०० ग्राम
  • धुप -२पॉकेट
  • चंदनपावडर -१००ग्राम


  • सप्तधान्य
  • सप्तमृतिका
  • सुपारी-१किलो
  • लौग-५०ग्राम
  • इलाईची-५०ग्राम
  • कापुस
  • अगरबत्ती
  • माचीस
  • शुद्ध घी-२किलो
  • सरसो का तेल-अधाकिलो
  • धान कि लाई
  • तालाब कि खज्जी
  • पारा
  • दर्भ
  • वास्तू मुर्ती
  • हवन कि लकडी-२किलो
  • दही -आधा किलो
  • दूध-१ लीटर
  • कछुआ की मुर्ती
  • चांदी का सर्प
  • गंगाजल
  • गुलाब जल
  • गोबर
  • लोहे कि सलिया १ फिट
  • दोना २ बण्डल
  • तांबे के लोटे-७
  • तांबडी -७
  • पीतल कि कटोरी २
  • टोप २
  • पीतल की थाली -१
  • काला तिल -१किलो

  • चने की दाल -१किलो
  • मुंग की दाल -१किलो
  • तुवर की दाल -१किलो
  • उड़द की दाल -१किलो
  • मसूर की दाल -१किलो
  • लोहवान -१००ग्राम
  • नवग्रह समीधा
  • मिट्टी के दीपक -छोटे १५ बडे २
  • सिमेंट
  • गैती
  • फावड़ा
  • कन्नी
  • मिट्टी के कलश -४
  • लाल कपडा २मीटर ,सफेद कपडा ५ मीटर ,पिला कपडा २ मीटर ,
    काला कपडा १ मीटर,हरा कपड़ा -सव्वा मीटर
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ५ ,कुर्ता ५ ,तौलिया ५ ,
    बनियान ५ ,रुमाल ५ , आसन ५,माला ५
  • देवतांओ के लिये:धोती ५ ,कुर्ता ५ ,तौलिया ५ ,बनियान ५ ,
    रुमाल ५ बडी,साडी ३,ब्लाउज ३
  • शृंगार सामग्री :
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार ,केला का खंबा २ बण्डल
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,
    मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

यमय धर्मराजाय मृत्वे चान्तकाय च | वैवस्वताय कालाय सर्वभूत चायाय च ||

नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इसे यम चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहते हैं. यह पर्व नरक चौदस और नरक पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है. आमतौर पर लोग इस पर्व को छोटी दीवाली भी कहते हैं. इस दिन यमराज की पूजा करने और व्रत रखने का व‍िधान है. ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन जो व्‍यक्ति सूर्योदय से पूर्व अभ्‍यंग स्‍नान यानी तिल का तेल लगाकर अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) यानी कि चिचिंटा या लट जीरा की पत्तियां जल में डालकर स्नान करता है, उसे यमराज की व‍िशेष कृपा म‍िलती है. नरक जाने से मुक्ति म‍िलती है और सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं. स्‍नान के बाद सुबह-सवेरे राधा-कृष्‍ण के मंदिर में जाकर दर्शन करने से पापों का नाश होता है और रूप-सौन्‍दर्य की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि महाबली हनुमान का जन्म इसी दिन हुऐ थे इसीलिए बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है.

क्‍यों मनाई जाती है छोटी दीवाली? नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली भी कहा जाता है. दरअसल, यह पर्व दीवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है और इस दिन घर के बाहर चतुर्मुख दीपक लगाने का महत्व है .

पूजा वस्तुओं /छोटी दीपावली पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२नग
  • कलश तांबे के -२
  • तांबडी -२
  • रोली -५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-७-नग
  • चांदी के दो शिक्के कलश मे डालने के लिये
  • इत्र-२ शीशी
  • पीली सरसो-२० ग्राम
  • गुड पावकिलो
  • दोना -१गड्डी
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • लक्ष्मी गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता ,साडी ,ब्लाऊज
  • शृंगार सामग्री :



  • पंचमेवा -२५०ग्राम
  • सुपाडी-३१नग
  • लौग-२५ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -आधा किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • मधु १शीशी
  • कच्चा दुध -१००ग्राम
  • दही -१००ग्राम
  • घी-अधा किलो
  • मीठा तेल -अधाकिलो
  • अगरबत्ती
  • कापुस
  • माचीस
  • पूजा का पान
  • धान कि खिल-१००ग्राम
  • बतासा-२५० ग्राम
  • नारिअल सुखा गोला
  • धनिया आखि-५० ग्राम
  • हळदी कि गांठ-११नग
  • कमल गठ्ठा -२१नग


  • मिट्टी के दीपक छोटे २१,बडे २
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • लक्ष्मी गणेश जी की बडी फोटो
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चोकी -२,पाटा -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,
    आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!||

जन्म के समय ग्रहों की दशा में जब राहु-केतु आमने-सामने होते हैं और सारे ग्रह एक तरफ रहते हैं, तो उस काल को सर्प योग कहा जाता है। जब कुंडली के भावों में सारे ग्रह दाहिनी ओर इकट्ठा हों तो यह कालसर्प योग नुकसानदायक नहीं होता। जब सारे ग्रह बाईं ओर इकट्ठा रहें तो वह नुकसानदायक होता है। इस आधार पर उन्होंने काल सर्प के 12 प्रकार भी बता दिए हैं।

पूजा वस्तुओं /कालसर्प पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-५
  • कलश तांबे के -५
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • सोने का नाग २
  • चांदी का नाग २,
  • ताँबे का नाग १६
  • काल सर्प यंत्र १
  • भस्म
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • काला उडद-२००ग्राम



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल- ५ किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-१ किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • काला वस्र -सव्वा मीटर
  • पीला वस्र -सव्वा मीटर
  • हरा वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • देवताओं के लिए वस्र
  • धोती ५ ,कुर्ता ५ ,तौलिया ५ ,बनियान ५ ,रुमाल ५
  • साडी बलाउज श्रृंगार सामग्री
  • पापड-१ पैकेट
  • गुग्गल- २०० ग्राम
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ -५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,नवग्रह कि लकडी , टोप पीतल के २,थाली १,कटोरी २,कांसे की कटोरी १,बांस की छाबडी १ )


  • चावल रंगनेका कलर -(लाल ,हरा ,पिला ,काला )
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,तौलिया
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • पाटा -३ ,चोकी -५
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्। वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥

देवी दुर्गा महिला मातृत्व और शक्ति का सार है दुर्गा पूजा जब सभी भक्त देवी दुर्गा की भक्ति के साथ पूजा करते हैं। भक्त की पूजा शक्ति के रूप में ब्रह्मांड का गठन किया। देवी दुर्गा अपने भक्तों के लिए रक्षक की भूमिका निभाती हैं दुर्गा पूजा पूरे विश्व में मनाया जाता है यहां, हम आपको दुर्गा पूजा उत्सव के बारे में पूरी जानकारी जानने के लिए सुनिश्चित करेंगे। दुर्गा पूजा की अवधि के दौरान, भक्तों ने नव दुर्गा के रूप में देवी दुर्गा की पूजा की। हिंदू कैलेंडर के अनुसार दुर्गा पूजा की सही तारीख और समय तय की जाती है। दुर्गा पूजा उत्सव के दस शुभ दिन के दौरान, कई अलग-अलग रस्में प्रदर्शन किए जाते हैं। लेकिन पिछले पांच दिनों में दुर्गा पूजा-महा सप्तमी, महाशक्ति, विजय दशमी और महा नवमी को पूरे विश्व में महान उत्सव, उत्साह और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंडित को खोजने और पुस्तक ऑनलाइन करने का एक आसान तरीका है। Panditji को खोजने के लिए सबसे विश्वसनीय तरीका है के माध्यम से ऑनलाइन पंडित बुक करें ।

पूजा वस्तुओं /दुर्गा पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश -१
  • रोली-५० ग्राम
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • अबीर-१००ग्राम
  • गुलाल-१००ग्राम
  • सिन्दूर-१००ग्राम
  • पीसी हल्दी-१०० ग्राम
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • घी-३किलो
  • कपुर-२०० ग्राम
  • गंगाजल
  • चावल
  • गेंहू
  • शक्कर
  • शहद
  • ,दोना-२ बण्डल
  • लाल कपडा
  • सफेद कपडा
  • पिला कपडा
  • काला कपडा -१मीटर
  • माताजी के लिये वस्र
  • साडी ,ब्लाउज ,पेटीकोट
  • इत्र
  • शृंगार सामग्री
  • धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा ,रुमाल



  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई
  • फुल
  • फुल माला- ५
  • तुलसी ,दुर्वा
  • बेलपत्र
  • आम का पत्ता
  • पान का पत्ता
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ-१ बण्डल
  • रुई-१ पैकेट
  • अगरबत्ती
  • माचिस
  • नारियल गट -१
  • काला उडद -१००ग्राम
  • पापड
  • नवग्रह बंडल
  • पितळ के टोप २
  • थाळी -१
  • कटोरी -२
  • गोबर कि कंडी-२
  • गोमूत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ ५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,कमल गट्टा ,गुगल ,बांस की टोकरी १ )


विशेष आहुती
  • शक्कर,कमल गट्टा
  • केला,शहद
  • गुगल,पान
  • सुपाडी,कमल फुल
  • लाचन्द,पिली सरसो
  • लाल फुल,बेलपत्र
  • राई,पालक
  • चांदी का त्रिशूल
  • सोना
  • चिरचिरी अपामार्ग
  • निंबू,गन्ना
  • कददु
  • नारियल,चावल
  • सफेद चंदन,सीताफल
  • पेडा
  • तीळ,धूप,हलवा
  • आवला,भोजपञ
  • गंगाजल,समुद्र फेन
  • सारियाली
  • काजल,हिंग,गुलाल,काला अबीर
  • लोहवान
  • केशर,कस्तुरी
  • चिरोजी,जायफळ,बेल
  • दाल कि पिठी
  • इंद्र जौ,धनुष बान
  • खीर
  • काली मिर्च,गुरुच
  • दही,अनार,घी
  • संतरा,पालक
  • कर्पूर,बरी,अनार का छिलका
  • इलायची,सर्वोश्नाधि,ऋतु फल
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

तदेव लग्नं सुदिनं तदेव ताराबलं चन्द्रबलं तदेव । विद्याबलं दैवबलं तदेव लक्ष्मीपते तेंऽघ्रियुगं स्मरामि ॥

यह पूजा । हिंदू धर्म में शादी से पहले भगवान गणेश के लिए एक प्रार्थना के साथ सगाई की पूजा किया जाता है जोड़ी के जीवन में खुशी लाने के लिए सगाई की पूजा कि जाता है यह समारोह शादी से कुछ महीनों पहले किया जाता है, जो हिन्दू अनुष्ठानों के अनुसार होता है। इस समारोह में लड़के और लड़की को एक नए रिश्ते में मिलाया जाता है, जो शादी की औपचारिक घोषणा भी कहा जाता है । इस पूजा में जोड़े के जीवन की नई शुरुआत के लिए शादी कि अंगूठी पहनाई जाती है और भगवान से प्रार्थना करते हैं

पूजा वस्तुओं /सगाई पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -१
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-५-नग
  • इत्र-१शीशी
  • सुपाडी बडी-१०० ग्राम
  • लौग-२५ ग्राम
  • इलायची-२५ ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट



  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-१ बण्डल
  • पीली सरसो-५०ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-५०० ग्राम
  • शक्कर -१००ग्राम
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -१००ग्राम
  • दही -५०ग्राम
  • घी-१००ग्राम
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल ,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये
  • चौकी -१

एक नया व्यापार शुरू करना या नई दुकान खोलना हमेशा एक विशेष बात है और लोग लाभ को अधिकतम करना चाहते हैं, क्योंकि पूजा किसी भी नए व्यवसाय या दुकान खोलने के लिए आयोजित की जाती है। आम तौर पर विष्णु, लक्ष्मी और कुबेर पूजा उस के लिए आयोजित की जाती है। इन देवताओं को भौतिक समृद्धि के लाने वाले के रूप में जाना जाता है और इसलिए उन्हें उसी दिन पूजा की जाती है।

व्यापार के लिए लक्ष्मी कुबेर पूजा का महत्व

वैध धन प्राप्त करने के लिए, यह पूजा करना चाहिए। व्यापारिक व्यक्तियों और वित्तीय समस्याओं वाले लोगों को इस पूजा को होल्मा के साथ ही माल्क्समी के आशीर्वाद और लालित्य प्राप्त करने के लिए करना चाहिए। धातु से बने यज्ञ का उपयोग भगवान कुबेर की शक्तियों के लिए किया जाता है और मा लक्ष्मी धन या धन प्राप्त करने के रास्ते में शाप और बाधा को दूर करने में मदद करता है।

यह धन और समृद्धि प्राप्त करने के लिए किया गया सबसे शक्तिशाली होममैन है। यह धन और देवता को एक साथ मिलकर बकाया राशि को ठीक करने में मदद करता है।

गणेश और गौरी पूजा

किसी भी पूजा में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह शुभ भाग्य के रूप में माना जाता है; कोई नया काम शुरू करने से पहले गणेश जी के लिए पहली बार प्रार्थना करें। भगवान गणेश का अन्य नाम 'विघ्नहर्ट' या 'विनायका' का अर्थ है कि वह सभी बाधाओं को हटा देगा। गणेशजी को ज्ञान और ज्ञान के भगवान के रूप में भी मापा जाता है। विश्वास के अनुसार, कोई ज्ञान प्राप्त कर सकता है और समझने में बहुत बुद्धिमान बन सकता है कि क्या अच्छा है और क्या नहीं है, जब वह भगवान गणेश को ईमानदारी से प्रार्थना करता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, किसी भी नए काम या किसी भी पूजा शुरू करने से पहले, अच्छे परिणाम के लिए गणपत जी मंत्र का मंत्र।

नवग्रह स्थानपना

नौ नवग्रहा हैं इसमें सूर्य शामिल है; चांद; ग्रह मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, और शनि; और आरोही और अवरोही चंद्र नोड्स, क्रमशः राहु और केतु के रूप में जाना जाता है

पूजा वस्तुओं /नया व्यापार पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-५
  • कलश -५
  • रोली-५० ग्राम
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • अबीर-१००ग्राम
  • गुलाल-१००ग्राम
  • सिन्दूर-१००ग्राम
  • पीसी हल्दी-१०० ग्राम
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • घी-३किलो
  • कपुर-२०० ग्राम
  • गंगाजल
  • चावल
  • गेंहू
  • शक्कर
  • शहद
  • ,दोना-२ बण्डल
  • लाल कपडा
  • अगरबत्ती
  • माचिस



  • सफेद कपडा
  • पिला कपडा
  • काला कपडा -१मीटर
  • माताजी के लिये वस्र
  • साडी ,ब्लाउज ,पेटीकोट
  • इत्र
  • शृंगार सामग्री
  • धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा ,रुमाल
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई
  • फुल
  • फुल माला- ५
  • तुलसी ,दुर्वा
  • बेलपत्र
  • आम का पत्ता
  • पान का पत्ता
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ-१ बण्डल
  • रुई-१ पैकेट


  • नारियल गट -१
  • काला उडद -१००ग्राम
  • पापड
  • नवग्रह बंडल
  • पितळ के टोप २
  • थाळी -१
  • कटोरी -२
  • गोबर कि कंडी-२
  • गोमूत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ ५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,कमल गट्टा ,गुगल ,बांस की टोकरी १ )
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नम: शिवायः ॥

आप भगवान शिव को खुश करने और अपने सभी पापों को नष्ट करने के लिए शिवरात्रि और अन्य अवसरों पर इस शिव पूजा कर सकते हैं। शिव पूजा भगवान शिव की पूजा है - हिंदू धर्म में "मंगल " के रूप में जाना जाता है। भगवान शिव हमेशा समाधि में रहते हैं। उन्होंने हिंदी कैलेंडर के फालगुन महीने के चक्कर के 14 वें दिन शिव लिंग के रूप में अवतार लिया। अभिषेका, मंत्र, तंत्र, क्रिया और मुद्राओं के उपयोग के साथ भगवान शिव की पूजा करने के लिए कई पारंपरिक और प्राचीन संस्कार हैं। वस्तुओं और शिव पूजा की प्रक्रिया भी विभिन्न संप्रदायों में भिन्न होती है|

पूजा वस्तुओं /शिव पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२नग
  • रोली-२५ग्राम
  • अबीर-२५ग्राम
  • गुलाल-२५ग्राम
  • सिन्दूर-२५ग्राम
  • पीसी हल्दी-२५ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-पाव किलो
  • लौग-२५ग्राम
  • इलायची-२५ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • कच्चा दुध -५ लीटर
  • दही -२००ग्राम
  • घी-अधा किलो



  • गंगाजल-१ शीशी
  • गुलाबजल
  • भस्म
  • नारियल पानी
  • गन्ने का रस
  • कलश २ तांबे के
  • मौसम्बी का ज्युस
  • चांदी का वर्क
  • भांग
  • पंचमेवा -१००ग्राम
  • लाल कपडा
  • पिला कपडा
  • सफेद कपडा
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर -१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१ किलो
  • गेंहु -१ किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • शहद -१ शीशी


  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,आसन,
  • देवतांओ के लिये:धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,साडी,ब्लाउज
  • शृंगार सामग्री
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र १००८
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ३,पाटा ४

सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे! तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: !!

भगवान कृष्ण के जन्म के अवसर पर कृष्ण पूजा का उत्सव मनाया जाता है। देवकी और वासुदेव के 8 वें पुत्र भगवान कृष्ण, आधी रात को 'रोहिणी नक्षत्र' के तहत अष्टमी दिवस पर पैदा हुए थे। इसे गोकुलाष्टमी या कृष्ण जयंती के रूप में भी जाना जाता है। श्री कृष्ण को भगवान विष्णु के सबसे गौरवशाली अवतार (अवतार) के रूप में माना जाता है, जो पृथ्वी पर उनका 8 वां अवतार भी है। सामान्यतः जन्माष्टमी द्वारका में दिव्य रूप में मनाया जाता है। द्वारका में, यह त्यौहार एक पवित्र भव्य रूप में मनाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भक्तों में द्वारकाशी मंदिर में भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं, यह द्वारका नागरी में आकर्षण का केंद्र है। लगभग एक सदी के लिए भगवान कृष्ण द्वारका में निवास किये उनके प्राणान्त के बाद , यह समुद्र में भर गया विश्वकर्मा के रूप में नामित सर्वोच्च वास्तुकार ने द्वारका शहर को सिर्फ दो दिनों में बनाया और इसमें कई जगहों के साथ। यह माना जाता है कि भगवान कृष्ण का जन्म अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक था। यह दिन मथुरा में बहुत प्रसन्नता और आनंद से मनाया जाता है जहां श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। लोग मिठाई और 'माखन मिश्री' को एक-दूसरे को देते हैं जिसे भगवान कृष्ण की पसंदीदा माना जाता है। कृष्णा जयंती के अगले दिन, देश के कुछ हिस्सों में 'हंदी फोड' का त्योहार मनाया जाता है।

पूजा वस्तुओं /कृष्ण पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी १ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्।। सर्वाबाधा विर्निर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।

चौकी के माध्यम से माता की चौकी एक धार्मिक विधी है माता की चौकीमे भजन कीर्तन किया जाता है जो शाम के समय किया जाता है , कभी भी वर्ष के दौरान किया जा सकता है। माता की चौकी में, समूह माता के बारे में उपदेश करता है, "जागृति" गाती है और दुनिया भर के भक्तों को उनकी प्रार्थनाओं के माध्यम से अपना सम्मान देने के लिए प्रेरणा देता है। यह कार्यक्रम, शादियों, सहभागिता, जन्मदिन, वर्षगाँठ या गणपति और नवरात्रि त्योहारों के दौरान खुश अवसरों पर आयोजित किया जा सकता है। माता दुर्गा दिव्य ऊर्जा और रचनात्मक शक्ति का अवतार है। माता दुर्गा भगवान देवी के रूप में राज करते हैं, हालांकि देवी के असंख्य रूप हैं और अंततः सभी एक हैं, फिर भी दुर्गा का रूप सबसे लोकप्रिय है। वैदिक मंत्र में, माता प्राइम भगवान है यहां पर्याप्त भक्तिसंगत संगीत है- जो लोगों के लिए नृत्य करने और जागरण और माता की चौकी की पूरी रात का आनंद लेने में लोगों के लिए आसान बनाता है इसके अलावा, कभी-कभी ये कलाकार, अलग-अलग देवताओं के रूप में भजन पर नाचते हैं और भक्ति भक्ति मोड में सभी को रखते हैं।

पूजा वस्तुओं /माता कीचौकी पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश -१
  • रोली-५० ग्राम
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • अबीर-१००ग्राम
  • गुलाल-१००ग्राम
  • सिन्दूर-१००ग्राम
  • पीसी हल्दी-१०० ग्राम
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • घी-३किलो
  • कपुर-२०० ग्राम
  • गंगाजल
  • चावल
  • गेंहू
  • शक्कर
  • शहद
  • ,दोना-२ बण्डल
  • लाल कपडा
  • सफेद कपडा
  • पिला कपडा
  • काला कपडा -१मीटर
  • माताजी के लिये वस्र
  • साडी ,ब्लाउज ,पेटीकोट
  • इत्र
  • शृंगार सामग्री
  • धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा ,रुमाल



  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई
  • फुल
  • फुल माला- ५
  • तुलसी ,दुर्वा
  • बेलपत्र
  • आम का पत्ता
  • पान का पत्ता
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ-१ बण्डल
  • रुई-१ पैकेट
  • अगरबत्ती
  • माचिस
  • नारियल गट -१
  • काला उडद -१००ग्राम
  • पापड
  • नवग्रह बंडल
  • पितळ के टोप २
  • थाळी -१
  • कटोरी -२
  • गोबर कि कंडी-२
  • गोमूत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ ५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,कमल गट्टा ,गुगल ,बांस की टोकरी १ )


विशेष आहुती
  • शक्कर,कमल गट्टा
  • केला,शहद
  • गुगल,पान
  • सुपाडी,कमल फुल
  • लाचन्द,पिली सरसो
  • लाल फुल,बेलपत्र
  • राई,पालक
  • चांदी का त्रिशूल
  • सोना
  • चिरचिरी अपामार्ग
  • निंबू,गन्ना
  • कददु
  • नारियल,चावल
  • सफेद चंदन,सीताफल
  • पेडा
  • तीळ,धूप,हलवा
  • आवला,भोजपञ
  • गंगाजल,समुद्र फेन
  • सारियाली
  • काजल,हिंग,गुलाल,काला अबीर
  • लोहवान
  • केशर,कस्तुरी
  • चिरोजी,जायफळ,बेल
  • दाल कि पिठी
  • इंद्र जौ,धनुष बान
  • खीर
  • काली मिर्च,गुरुच
  • दही,अनार,घी
  • संतरा,पालक
  • कर्पूर,बरी,अनार का छिलका
  • इलायची,सर्वोश्नाधि,ऋतु फल
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वति भगवती निःशेषजाड्यापहा

यह माना जाता है कि इस दिन देवी सरस्वती का जन्म हुआ था। हिंदू मंदिरों, घरों और यहां तक ​​कि स्कूलों और कॉलेजों में महान उत्साह के साथ वसंत पंचमी मनाते हैं। सरस्वती का पसंदीदा रंग सफेद इस दिन विशेष महत्व रखता है। देवी की मूर्तियों को सफेद कपड़े पहने जाते हैं और भक्तों द्वारा सफेद वस्त्रों की प्रशंसा करते हैं। सरस्वती को मिठाई की पेशकश की जाती है जो कि प्रथागत पूजा में भाग लेने वाले सभी लोगों को 'प्रसाद' के रूप में दी जाती है। वत्सभक्ति के दौरान भारत के कई हिस्सों में पितृ तारपीण के रूप में जाना जाता है, पूर्वजों की पूजा का एक कस्टम भी है। माँ सरस्वती विद्द्या की देवी है माता को हंसवाहिनी के नाम से भी जाना जाता है। हर वर्ष प्रत्येक शिक्षक संस्थानों पर विद्दार्थियों के द्वारा सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन माता की प्रतिमा स्थापित की जाती है और तथा इस दिन पीले वस्त्र धारण करने का भी रिवाज है। इस दिन पूजा में माता का श्रृंगार किया जाता है और माता के चरणों में गुलाल अर्पित किया जाता है। इसके इलावा माता के चरणों में पीले रंग का फ़ल चढ़ाया जाता है। और श्रद्धापूर्वक घी के दिए जलाए जाते हैं आरती होती है और भोग अर्पित किया जाता है , इस पूजन के दौरान ओंम ऐ सरस्वतैय नम : इस मंत्र का जप किया जाता है।

पूजा वस्तुओं /सरस्वती पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२नग
  • कलश तांबे के -२
  • तांबडी -२
  • रोली -५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-७-नग
  • चांदी के दो शिक्के कलश मे दालने के लीये
  • इत्र-२ शीशी
  • पीली सरसो-२० ग्राम
  • गुड पावकिलो
  • दोना -१गड्डी
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • लक्ष्मी गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता ,साडी ,ब्लाऊज



  • पंचमेवा -२५०ग्राम
  • सुपाडी-३१नग
  • लौग-२५ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -आधा किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • मधु १शीशी
  • कच्चा दुध -१००ग्राम
  • दही -१००ग्राम
  • घी-अधा किलो
  • मीठा तेल -अधाकिलो
  • अगरबत्ती
  • कापुस
  • माचीस
  • पूजा का पान
  • धान कि खिल-१००ग्राम
  • बतासा-२५० ग्राम
  • नारिअल सुखा गोला
  • धनिया आखि-५० ग्राम
  • हळदी कि गांठ-११नग
  • कमल गठ्ठा -२१नग


  • शृंगार सामग्री :मिट्टी के दीपक छोटे २१,बडे २
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • लक्ष्मी गणेश सरस्वती जी की बडी फोटो,
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी १ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

रुद्रा: पञ्चविधाः प्रोक्ता देशिकैरुत्तरोतरं । सांगस्तवाद्यो रूपकाख्य: सशीर्षो रूद्र उच्च्यते ।। एकादशगुणैस्तद्वद् रुद्रौ संज्ञो द्वितीयकः । एकदशभिरेता भिस्तृतीयो लघु रुद्रकः।। “रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र:”

रुद्राष्टाध्यायी को यजुर्वेद का अंग माना जाता है। वैसे तो भगवान शिव अर्थात रुद्र की महिमा का गान करने वाले इस ग्रंथ में दस अध्याय हैं लेकिन चूंकि इसके आठ अध्यायों में भगवान शिव की महिमा व उनकी कृपा शक्ति का वर्णन किया गया है। इसलिये इसका नाम रुद्राष्टाध्यायी ही रखा गया है। शेष दो अध्याय को शांत्यधाय और स्वस्ति प्रार्थनाध्याय के नाम से जाना जाता है। रुद्राभिषेक करते हुए इन सम्पूर्ण 10 अध्यायों का पाठ रूपक या षडंग पाठ कहा जाता है। वहीं यदि षडंग पाठ में पांचवें और आठवें अध्याय के नमक चमक पाठ विधि यानि ग्यारह पुनरावृति पाठ को एकादशिनि रुद्री पाठ कहते हैं। पांचवें अध्याय में “नमः” शब्द अधिक प्रयोग होने से इस अध्याय का नाम नमक और आठवें अध्याय में “चमे” शब्द अधिक प्रयोग होने से इस अध्याय का नाम चमक प्रचलित हुआ। दोनों पांचवें और आठवें अध्याय पनरावृति पाठ नमक चमक पाठ के नाम से प्रसिद्ध हैं। एकादशिनि रुद्री के ग्यारह आवृति पाठ को लघु रूद्र कहा जाता है। वहीं लघु रुद्र के ग्यारह आवृति पाठ को महारुद्र तो महारुद्र के ग्यारह आवृति पाठ को अतिरुद्र कहा जाता है।

पूजा वस्तुओं / लघुरुद्र पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२नग
  • रोली-२५ग्राम
  • अबीर-२५ग्राम
  • गुलाल-२५ग्राम
  • सिन्दूर-२५ग्राम
  • पीसी हल्दी-२५ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-पाव किलो
  • लौग-२५ग्राम
  • इलायची-२५ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • कच्चा दुध -५ लीटर
  • दही -२००ग्राम
  • घी-अधा किलो



  • गंगाजल-१ शीशी
  • गुलाबजल
  • भस्म
  • नारियल पानी
  • गन्ने का रस
  • कलश २ तांबे के
  • मौसम्बी का ज्युस
  • चांदी का वर्क
  • भांग
  • पंचमेवा -१००ग्राम
  • लाल कपडा
  • पिला कपडा
  • सफेद कपडा
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर -१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१ किलो
  • गेंहु -१ किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • शहद -१ शीशी


  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,आसन,
  • देवतांओ के लिये:धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,साडी,ब्लाउज
  • शृंगार सामग्री
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र १००८
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ३,पाटा ४

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् । सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातात्मजं नमामि ॥

हनुमान चालीसा हनुमान को संबोधित एक हिंदू भक्ति भजन है। पारंपरिक रूप से माना जाता है कि यह 16 वीं शताब्दी के कवि तुलसीदास द्वारा अवधी भाषा में लिखा गया है, शब्द "चालीसा" से लिया गया है, जिसका मतलब है कि संख्या चालीसा हिंदी में है , जैसा हनुमान चालीसा में 40 छंद हैं। हनुमान चालीसा को जपने या सुनने के लाभ अनंत और अविश्वसनीय हैं। यह माना जाता है कि यदि एक भक्त इन 40 छंदों को शुद्ध भक्ति और ध्यान के साथ पढ़ता है, तो उन्हें उसे पुरस्कृत किया जाता है और सभी इच्छाएं सच हो जाती हैं चालीसा के नियमित रूप से गठजोड़ आपको भगवान की आशीषों के साथ देता है और आपको महिमा शक्तियों के साथ अनुग्रह प्रदान करता है। समर्पण और समर्पण के साथ हनुमान चालीसा के दैनिक पाठ एक परिवार में सभी तरह के असहमति और तर्कों को दूर करते हैं और जीवन में एकमत, संतोष, खुशी और शांति को बढ़ावा देते हैं। यह नकारात्मकता को दूर करता है और रिश्तों में सद्भाव लाता है।

पूजा वस्तुओं / हनुमान पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी १ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं, सीतासमारोपितवामभागम। पाणौ महासायकचारूचापं, नमामि रामं रघुवंशनाथम॥३॥

अखण्ड रामायण पाठ का अर्थ है कि लगातार 24 घंटों के लिए पूरे रमन को बिना किसी ब्रेक के गायन / गायन करना। इस पाथ का प्रदर्शन करके भगवान राम के गुण हो सकते हैं जो बाधाओं को दूर करने और पारिवारिक नैतिकता की सुरक्षा में विशेषज्ञ हैं। अखंड रामायण के लाभ असंख्य हैं लेकिन उनमें से कुछ हैं:

यह परिवार में शांति, समृद्धि और खुशी प्रदान करता है।

यह किसी भी नए उद्यम की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है जैसे व्यवसाय शुरू करना, एक नई सभा (गृह प्रवेश) दर्ज करना, एक बच्चे का जन्म, विवाह समारोह आदि।

यह किसी अप्रत्याशित हानि और विशेष रूप से स्वास्थ्य से संबंधित खतरे को रोकता है।

यह एक जगह पर बहुत पवित्र और दिव्य वातावरण बनाता है।

यह पूजा करने का एक अच्छा समय राम नवमी है जिसे भगवान राम के जन्म दिवस के रूप में माना जाता है।

पूजा वस्तुओं / अखण्ड रामायण पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता,साड़ी ,ब्लाउज ,श्रृंगार सामग्री


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी १ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठ । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ।

सुन्दरकाण्ड 'रामायण' नामक हिंदू पवित्र पुस्तक का पांचवें अध्याय है। रामायण को तुलसीदास द्वारा निम्नलिखित अध्यायों में विभाजित किया गया है, जिसमें भगवान श्रीराम के जीवन की घटनाओं और महत्व के अनुसार

सुन्दरकाण्ड पांचवें अध्याय और रामायण का सबसे सुखी कांड है। खंड सीता की तलाश में हनुमानजी की यात्रा लंका का विवरण है। सुन्दरकाण्ड को पठित करना बहुत शुभ माना जाता है और यह हनुमानजी की पूजा करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। सुवर्णकांगा जाम्ब वंत के साथ शुरू होता है जिसमें हनुमानजी को उनकी शक्तियों के बारे में याद दिलाता है और हनुमान जी ने श्रीलंका की यात्रा पर मा सीता को खोजने के लिए स्थापित किया था। हनुमानजी के नाम सुंदर हैं। सुंदर्क और हनुमान जी के गुणों का वर्णन करते हैं और हनुमानजी के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। सुन्दरकाण्ड हमें सिखाता है कि धर्म अकेले जीत जाएगा। हनुमान पूजा को सभी इच्छाओं को पूरा करने के लिए माना जाता है। शास्त्र में इसके आशीर्वाद पाने के लिए कई कदम हैं और उनमें से एक सुन्दरकाण्ड पथ है। रामचरित मानस में सुन्दरकाण्ड को बहुत महत्व दिया गया है।

पूजा वस्तुओं /सुन्दरकाण्ड पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी १ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम् विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

भगवान विष्णु मानव जाति के लिए जाने वाले सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक है, इसलिए, विष्णु सहस्त्रम् पूजा करने में काफी महत्वपूर्ण है। यह पूजा एक पति और पत्नी के विवाहित जीवन में खुशी और समृद्धि लाने के लिए भी की जाती है। इसलिए, नवविवाह के लिए, या उस मामले के लिए एक पुराने दंपति भी, यह एक बहुत महत्वपूर्ण पुजान है भगवान विष्णु की पूजा को शोडोपोपचारों के साथ किया जाता है, अर्थात् विष्णुस्कात्म, पुरुषोत्तर, नारायणोपनिषद और भगवान विष्णु के 1008 नामविल्ली जाप का जप है। ये जप करने के लिए आपके नाम और आपकी इच्छा में भी किया है।

पूजा वस्तुओं /विष्णु सहस्त्र नामा पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • सत्यनारायण भगवान के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • गुग्गल- २०० ग्राम
  • केला खम्बा -१ बण्डल
  • सुतली -१ बण्डल
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-५००ग्राम ,जौ -२५०ग्राम ,हवन सामग्री -५००ग्राम ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-२किलो ,नवग्रह कि लकडी)
  • चौकी १ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांतीं समप्रभं कुमारं शक्तिहस्तंच मंगलं प्रणमाम्यहं

जिस जातक की कुंडली मैं मंगल 1, 4, 7, 8, ओर 12 घर मैं स्तिथ हो वह मांगलिक होता हे । मंगल उष्ण प्रकृति का ग्रह है, इसे पाप ग्रह माना गया है और ज्योतिष विज्ञान मैं इसका बहुत महत्वपूर्ण स्थान हे । मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार मे उन्नति एवं प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है. वैवाहिक जीवन में शनि को विशेष अमंलकारी माना गया है.

ऐसा माना जाता है कि "मंगलिक दोष" (या "मांगिक डोश" या "मंगल दोष") मुख्य रूप से किसी व्यक्ति के विवाहित जीवन को प्रभावित करता है। इससे पति और पत्नी के बीच विरोधाभास और तनाव हो सकता है कुछ लोगों का मानना ​​है कि एक मंगल और नॉन-मांगलिक के बीच विवाह करने से भागीदारों में से एक की मौत हो सकती है । ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यदि मंगल पहले, चौथे, सातवें, जन्म कुंडली में आठवीं स्थिति में कार्य करता है तो मनुष्य या महिला को मंगलिक कहते हैं। इस स्थिति में वह अलग-अलग समस्याओं से पीड़ित है। कभी-कभी यह देर से विवाह के लिए कारण होता है उस मामले में दुल्हा और दुल्हन दोनों ही मंगलिक होना चाहिए। मनुष्य या महिला के मंगलदोष के प्रभाव से कभी-कभी कम आयु मैं, बीमारी और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मंगल शांति इन सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान है मांगलिक व्यक्ति विनम्र, निर्भय, प्रभावशाली, होशियार, केंद्रित, अनुशासित पर गुस्सैल होते हैं । उनमैं से जो वाइब्रेशन्स उत्पन्न होती हैं वे बहुत शक्तिमान एवं तेजस्वी होती हैं । इसी कारण ऐसा माना जाता हे की सिर्फ एक मांगलिक ही दूसरे मांगलिक की प्रकृति के साथ शांतिपूर्वक निभा सकता हे । एक और विचारधारा जो हमारे समाज मैं प्रचलित हे वह ये हे की 28 साल की उम्र के बाद मंगल का दोष कम हो जाता हे ।

पूजा वस्तुओं /मंगल दोष पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-५
  • कलश तांबे के -५
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-१किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-५किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -१ किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-२ किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • हरा वस्र-सव्वा मीटर
  • पिला वस्र -सव्वा मीटर
  • मंगल के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता,बनियान,गमछा,रुमाल(५)
  • चावल रंगनेका कलर -(लाल ,हरा ,पिला ,काला )
  • पापड-१ पैकेट
  • काला उडद-२००ग्राम
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • गुग्गल- २०० ग्राम


  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ -५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,नवग्रह कि लकडी ,तांबडी ५ टोप पीतल के २,थाली १,कटोरी २,कांसे की कटोरी १,बांस की छाबडी १ )
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • गणेश जी की मूर्ति
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी ५ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्। नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।। इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा। सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्।। मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा। तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि।। नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा। द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।

पितरों पूजा पूर्वजों के प्रति सम्मान देने का एक तरीका है। दिवंगत पूर्वजों के लिए पित्रपक्ष एक बार एक वर्ष में अश्विन महीनों में शरद ऋतु में मनाया जाता है। इसकी अवधि पूर्णिमा (पूर्णिमा) से 15 दिनों की है (अमावस)। हम इसे श्राद्ध, श्राद्ध पाखवाड़ा, श्राद्ध पर्व भी कहते हैं, जिसके द्वारा आप उन दिवंगत पूर्वजों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिसमें हम इस अनुष्ठान द्वारा उन्हें चुकाते हैं।

बहुत से समस्याएं किसी के जीवन में हो सकती हैं, उनके पितृ खुश नहीं हैं। पितृदोष पूर्वजों से एक अभिशाप नहीं है, लेकिन यह पूर्वजों का ऋण है। अपने जन्म कुंडली में पितृ दोष वाले व्यक्ति को पूर्वजों के ऋण के लिए भुगतान करना पड़ता है। इसलिए जन्म कुंडली में एक पितृ दोष का मतलब यह नहीं है कि पूर्वजों ने अपने जन्म कुंडली में पितृ दोष वाले व्यक्ति को शाप दिया है। वेदिक ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में पितृ दोष निस्संदेह सबसे अधिक भयभीत दोषों में से एक है और यह अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की समस्याओं और दुर्भाग्य से इन्सान को परेशान कर सकता है। ऐसे ही सद्कर्मो से सौभाग्यशाली बनने के लिये धार्मिक उपायों में पितृ पूजा और स्मरण का महत्व शास्त्रों में बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पितृदोष इंसान के जीवन में गहरी परेशानियों, असफलता और संकट का कारण बन सकता है। कुण्डली में राहु-केतु ग्रहों के कारण बने बुरे योग भी पितृदोष पैदा करते हैं। तीर्थ या पवित्र जलाशय में स्नान कर वहां किसी विद्वान ब्राह्मण से पितृ तर्पण व श्राद्ध कर्म कराएं। घर में पितरों की तस्वीर की गंध, अक्षत, काले तिल चढ़ाकर या पीपल के वृक्ष में जल अर्पित कर नीचे लिखेपितृस्तोत्रका पाठ करें या करवाएं।

पूजा वस्तुओं /पार्वण श्राद्ध पितृ पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-१
  • नारियलगट-१नग
  • रोली-५० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • पान का पत्ता :२५ नग
  • सुपाडी-२५ नग
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • माचिस
  • रुई
  • गोपीचन्दन
  • मिट्टी के दीपक -४
  • शहद -१शीशी
  • तिल का तेल-१०० ग्राम
  • कच्चा दुध -२५० ग्राम
  • घी-१किलो
  • चावल-१किलो
  • १ दर्जन फल



  • मिठाई १किलो
  • पंचमेवा-५००ग्राम
  • डाम खंडन
  • २ बनियान ,तौलिया ,रुमाल,धोती,कुर्ता
  • सोने की टिकली
  • चांदी के बर्तन -५
  • पीतल के टोप -२
  • पीतल के लोटे -२
  • मिट्टी
  • धोती
  • दोना
  • पत्तल
  • तिल -२००ग्राम
  • जौ -२०० ग्राम
  • हवन सामग्री -२००ग्राम
  • लकड़ी-१किलो
  • कंडी


  • फूल सफ़ेद -आधा किलो
  • माला-२
  • आम का पत्ता
  • शक्कर -आधा किलो
  • ८ वस्त्र
  • ८ फल
  • लोटा -८
  • हवन कुंड
  • चौकी १ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,

ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम | छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ||

सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: | दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ||

शनि देव् को कर्मफलदाता माना गया है जो मनुष्य को उसके कर्मो के अनुसार अच्छा या बुरा फल प्रदान करते है इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्मो को करना चाहिए और बुरे कर्मो से बचना चाहिए | शनिवार को भगवान शनि की अराधना की जाती है | सभी भगवानो में से शनि भगवान सबसे ज्यादा घातक माना जाता है, इनकी नजर जिस मनुष्य पर पड़ती है वह अपने सुख, शांति, व्यापार आदि सभी में परेशानी अनुभव करता है और खुद भी अव्यवस्थित और अस्वस्थ हो जाता है | ये भी माना जाता है की भगवान शनि जिसके जीवन में आते है तो उसके जीवन पर इसका बहुत ही नकारात्मक असर पड़ता है | आप भी जान सकते है की भगवान शनि देव जी का व्रत और पूजा विधि कैसे घर पर कर सकते हैं -

शनिंदोश निवारण पूजा शनि दशा को हटाने के लिए और शनि की पूर्ण स्वीकृति के माध्यम से राजयोग को प्राप्त करने के लिए उपयोग की जाती है। यह पूजा बहुत लाभदायक साबित होती है जब शनि राशिफल में पीड़ित होती है। अवसाद के समय के दौरान शनिहांत्र बहुत उपयोगी थे। यह पूजा निजी जीवन में और साथ ही व्यावसायिक जीवन में सफलता को दर्शाती है। पूजा को मूल रूप से भगवान शनि का आशीर्वाद प्राप्त करने और शनिदोष का औचित्य सिद्ध करने के लिए किया जाता है। जन्म कुंडली के विशिष्ट घर में शनि की स्थिति मूल निवासी के लिए समस्या पैदा करती है। शनि का प्रभाव बहुत कम है क्योंकि यह बहुत धीमी गति से चलती ग्रह है। उड़द, गुड, लोहा, तिल, जौ, तेल और काले वस्त्र (जितना भी संभव हो ) दान के लिए |

पूजा वस्तुओं /शनिदोश निवारण पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-५
  • कलश तांबे के -५
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-४ किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-२किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • काला वस्त्र-सव्वा मीटर
  • हरा वस्त्र-सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • शनि के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता ,बनियान ,गमछा(५)
  • साडी ,ब्लाऊज,श्रृंगार सामग्री


  • कलर (लाल,हरा ,पिला ,काला )
  • गुग्गल- २०० ग्राम
  • काला उडद-२००ग्राम
  • पापड-१ पैकेट
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ -५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,नवग्रह कि लकडी ,तांबडी ५ टोप पीतल के २,थाली १,कटोरी २,कांसे की कटोरी १,बांस की छाबडी १ )
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • गणेश जी की मूर्ति
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • हवन कुंड
  • चौकी २ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

सशङ्खचक्रं सकिरीटकुण्डलं सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम् । सहारवक्षस्स्थलशोभिकौस्तुभं नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम् ॥

अशलेशा, मुल्ला, अस्विनी, माघ, रेवती और ज्येष्ठ में व्यक्ति की चंद्र की स्थिति के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए मूल शांति यज्ञ / पूजा की जाती है। देशी चार्ट के अनुसार, यज्ञ को होमाम के साथ दुर्गा, गणेश, शिव या विष्णु या नवग्रह शांति के होम के साथ जोड़ा जा सकता है। मूल शांति यज्ञ व्यक्ति के स्वास्थ्य, बच्चों के स्वास्थ्य को बनाए रखने और नवग्रह दोष को हटाने के लिए किया जाता है।

मूल शांति यज्ञ के लाभ

मूल शांति यज्ञ एक व्यक्ति के जीवन में बहुत उपयोगी है क्योंकि यह चरित्र को बढ़ाने के लिए मानव को लाभ देता है और नक्षत्र के सभी बुरा प्रभावों को कम करके सकारात्मक भावनाओं को लाता है, जो विशिष्ट जन्म के समय के कारण था।

सभी शारीरिक स्थिति से संबंधित मुद्दों को हटाया जा रहा है और जीवन संपदा से भरा रहता है।

शुभ समय पर जन्म के कारण निकट और प्रियजनों को खतरे से बचाया जा सकता है।

पूजा वस्तुओं / मूल शांति पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-५
  • कलश तांबे के -५
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • गंगा जल
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-४ किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -१किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • पापड-१ पैकेट
  • काला उडद-२००ग्राम



  • घी-२किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • पिला-सव्वा मीटर
  • हरा-सव्वा मीटर
  • काला-सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • देवताओंके लिये वस्र
  • धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा(५)
  • काला तील -आधा किलो
  • जौ -आधा किलो
  • हवन सामग्री -आधा किलो
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • गूगल -१००ग्राम
  • पीली सरसो -५०ग्राम
  • आम की लकड़ी -२किलो
  • नवग्रह बण्डल -१
  • कंडी -२
  • काँसे की थाली-१
  • पीतल के टोप -२
  • पीतल की कटोरी-२
  • काँसे की कटोरी -१
  • गोमूत्र
  • पंचरत्न
  • मुल की सुवर्ण मुर्ति
  • चांदी का सिक्का -२


  • रुई ,बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • २७ कुँए का जल
  • २७ छेद की मटकी
  • २७ कंकड़
  • २७ पेड़ के पत्ते
  • ७ जगह की मिटटी
  • शतौषधी
  • शवौषधी
  • जटामासी
  • अगर
  • तगर
  • नागर मोथा
  • बॉस की टोकरी
  • कंबल
  • गुलाबजल
  • कलर-४ (लाल ,पिला,हरा,काला )
  • कच्चा सूत
  • चौकी ५,पाटा ४
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

हिंदू धर्म के अनुसार बच्चे का जन्म हुआ है तो इस समारोह को नामकरण संस्कार कहा जाता है। यह समारोह सिर्फ एक धार्मिक संस्कार नहीं है बल्कि इसके सामाजिक और कानूनी पहलू भी हैं। यह बच्चे के जीवन में पहला समारोह है और इसलिए यह बच्चे और उसके परिवार के बीच एक अच्छा बंधन बनाने में मदद करता है। यह आमतौर पर जन्म के 12 वें दिन के बाद आयोजित किया जाता है लेकिन यह क्षेत्र और लोकाचार के अनुसार होता हैं ।

नामकरण प्रत्येक हिंदू बच्चे के लिए समारोह है। यह एक आस्था में एक बच्चा को शुरू करने का एक आध्यात्मिक अभ्यास है, और इसी तरह नवजात शिशु के माता-पिता को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को याद दिलाने के लिए। नामकरण संस्कार पूजा बच्चे को संस्मरण प्रदान करने का एक अनुष्ठान है, जिसे चरित्र को आकार देने और एक बच्चे की परवरिश करने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वेदों और सूत्रों के मुताबिक नवजात शिशुओं के नामकरण करते समय कुछ दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। गृहीत सूत्र के अनुसार, एक बच्चे का नाम राशी के अनुसार होना चाहिए।

पूजा वस्तुओं / नामकरण पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • गंगा जल
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • कलर (लाल ,हरा ,पीला,काला )
  • पापड-१ पैकेट
  • काला उडद-२००ग्राम



  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-४ किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -१किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-२ किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता
  • काला तील -आधा किलो
  • जौ -आधा किलो
  • हवन सामग्री -आधा किलो
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • गूगल -१००ग्राम
  • पीली सरसो -५०ग्राम
  • आम की लकड़ी -२किलो
  • नवग्रह बण्डल -१
  • कंडी -२


  • काँसे की थाली-१
  • पीतल के टोप -२
  • पीतल की कटोरी-२
  • काँसे की कटोरी -१
  • गोमूत्र
  • पंचरत्न
  • सोने का तार
  • चांदी का सिक्का -२
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • गणेश जी मुर्ति
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी -१
  • पाटा -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम: शिवाय ॥

हिंदू पौराणिक कथाओं में शिवरात्रि पूजा को जबरदस्त महत्व दिया गया है यह कहा जाता है कि भगवान शिव की अनुष्ठान पूजा शिवरात्रि दिवस पर भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रसन्न करती है। भक्तों का मानना ​​है कि भगवान शिखर को शुभ शिवरात्रि दिवस पर प्रसन्न करने से, एक व्यक्ति को पिछले पापों से गुमराह किया जाता है और मोक्ष या मुक्ति के साथ आशीष प्राप्त होती है। इसके अलावा, शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा को महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। जबकि, विवाहित महिलाएं अपने पति और पुत्रों की भलाई के लिए शिव से प्रार्थना करती हैं, अविवाहित महिला शिव की तरह एक पति के लिए प्रार्थना करते हैं, जिसे आदर्श पति माना जाता है।

शिवरात्रि पूजा के गुण

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव की ईमानदारी से पूजा भक्तों के लिए आध्यात्मिक विकास सहित गुणों को जन्म देती है। यह शिवरात्रि पूजा करने के लिए सही रास्ते पर विस्तृत विवरण भी प्रदान करता है।

  • दूध पवित्रता और धार्मिकता के आशीर्वाद के लिए है
  • दही समृद्धि और संतान के लिए है
  • हनी मिठाई भाषण के लिए है
  • घी जीत के लिए है
  • चीनी खुशी के लिए है
  • जल शुद्धता के लिए है।

पूजा वस्तुओं /महाशिवरात्रि पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२नग
  • रोली-२५ग्राम
  • अबीर-२५ग्राम
  • गुलाल-२५ग्राम
  • सिन्दूर-२५ग्राम
  • पीसी हल्दी-२५ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-पाव किलो
  • लौग-२५ग्राम
  • इलायची-२५ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • कच्चा दुध -५ लीटर
  • दही -२००ग्राम
  • घी-अधा किलो



  • गंगाजल-१ शीशी
  • गुलाबजल
  • भस्म
  • नारियल पानी
  • गन्ने का रस
  • कलश २ तांबे के
  • मौसम्बी का ज्युस
  • चांदी का वर्क
  • भांग
  • पंचमेवा -१००ग्राम
  • लाल कपडा
  • पिला कपडा
  • सफेद कपडा
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर -१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१ किलो
  • गेंहु -१ किलो
  • शक्कर -पाव किलो
  • शहद -१ शीशी


  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,आसन,
  • देवतांओ के लिये:धोती,कुर्ता,तौलिया ,बनियान,रुमाल,साडी,ब्लाउज
  • शृंगार सामग्री
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :४१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र १००८
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ३,पाटा ४

गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश की जयंती के रूप में मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी पर, भगवान गणेश को ज्ञान, समृद्धि और अच्छे भाग्य के देवता के रूप में पूजा की जाती है। यह माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म भद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष के दौरान हुआ था। वर्तमान में गणेश चतुर्थी दिवस अंग्रेजी कैलेंडर में अगस्त या सितंबर के महीने में गिरता है।

गणेशोत्सव, गणेश चतुर्थी का उत्सव, अनंत चतुर्दशी पर 10 दिन बाद समाप्त होता है जिसे गणेश विसर्जन दिवस भी कहा जाता है। अनंत चतुर्दशी पर, भक्त भक्त एक मन्त्री के बाद जल निकाय में भगवान गणेश की मूर्ति को विसर्जित करते हैं गणेशोत्सव का उत्सव, गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिनों के अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है, जिसे गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन दिवस भी कहा जाता है, भगवान गणेश के भक्त घर गणेश की मूर्तियों को लाओ और 1 और आधा, 3, 5, 7 या 9 दिन के लिए पूजा करें और फिर भगवान गणेश की मूर्ति को पानी में विसर्जित करें। आप गणपति स्थानपना और विसारण के लिए ऑनलाइन पंडितजी बुक कर सकते हैं।

आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचरा प्राणाः शरीर गृहं । पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः ।। सञ्चारः पदयो प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो । यद्यतकर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम् ।।

अन्नप्राशन एक लोकप्रिय हिंदू अनुष्ठान है जो नवजात शिशुओं द्वारा ठोस भोजन की शुरुआत करता है। इस अनुष्ठान के बाद, अन्य दूध देने वाले खाद्य पदार्थ नवजात शिशु के आहार के लिए पेश किए जाते हैं। हालांकि समारोह के अनुष्ठान क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकते हैं, जबकि अन्नप्रसन बच्चे के ठोस भोजन की ओर संक्रमण का जश्न मनाता है। अन्नप्रकाश का आयोजन तब किया जाता है जब एक नवजात बच्चा ठोस आहार का उपभोग करने के लिए तैयार होता है अन्नप्राशन समारोह छह महीने के बाद और पहले जन्मदिन के पहले किया जा सकता है। लड़कों के लिए, अन्नप्राशन भी महीने के दौरान किया जाता है, आमतौर पर बच्चे के छठे, आठवीं या दसवें महीने में। अन्नप्राशन लड़कियों के लिए , आमतौर पर बच्चे का सातवां, नौवां या ग्यारह महीने। अन्नप्राशन मुख्य रूप से घर या मंदिर में आयोजित किया जाता है।

अन्नप्राशन संस्कार का उद्देश्य पवित्रता की भावना दिखा रहा है और यह शरीर के स्वस्थ विकास और शक्ति के लिए किया जाता है। यह भोजन की शुद्धता के महत्व को सिखाता है शास्त्रों का कहना है कि यदि आप धार्मिक भोजन खाते हैं तो आपका मन पवित्र होगा भोजन स्वाद के लिए नहीं है, बल्कि शरीर और स्वास्थ्य के विकास के लिए भी है। देवताओं और देवी को पहली बार आमंत्रित किया जाता है और बच्चे को खिलाने से पहले भोजन की पेश की जाती है।

पुजा सामग्री /अन्नप्राशन पुजा

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम



  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी २,पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि । दारिद्रयदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता ॥2॥

माँ दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है। दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है उसे सतचण्डी यज्ञ बोला जाता है। सतचण्डी यज्ञ को सनातन धर्म में बेहद शक्तिशाली वर्णित किया गया है। इस यज्ञ से बिगड़े हुए ग्रहों की स्थिति को सही किया जा सकता है और सौभाग्य इस विधि के बाद आपका साथ देने लगता है। इस यज्ञ के बाद मनुष्य खुद को एक आनंदित वातावरण में महसूस कर सकता है। वेदों में इसकी महिमा के बारे में यहाँ तक बोला है कि सतचण्डी यज्ञ के बाद आपके दुश्मन आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। इस यज्ञ को गणेशजी, भगवान शिव, नव ग्रह, और नव दुर्गा (देवी) को समर्पित करने से मनुष्य जीवन धन्य होता है।

पूजा वस्तुओं /सतचण्डीपूजा सामग्री

  • श्रीफळ-७
  • कलश -७
  • रोली-५० ग्राम
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • अबीर-१००ग्राम
  • गुलाल-१००ग्राम
  • सिन्दूर-१००ग्राम
  • पीसी हल्दी-१०० ग्राम
  • सुपाडी बडी-१ किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • घी-५किलो
  • कपुर-२०० ग्राम
  • गंगाजल
  • चावल
  • गेंहू
  • शक्कर
  • शहद
  • दोना-२ बण्डल
  • लाल कपडा
  • सफेद कपडा
  • पिला कपडा
  • काला कपडा -१मीटर
  • माताजी के लिये वस्र
  • साडी ,ब्लाउज ,पेटीकोट
  • इत्र
  • शृंगार सामग्री
  • धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा ,रुमाल
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ११ ,कुर्ता ११ ,तौलिया ११ ,बनियान ११ ,रुमाल ११ , आसन ११ , माला ११



  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई
  • फुल
  • फुल माला- ५
  • तुलसी ,दुर्वा
  • बेलपत्र
  • आम का पत्ता
  • पान का पत्ता
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ-१ बण्डल
  • रुई-१ पैकेट
  • अगरबत्ती
  • माचिस
  • नारियल गट -१
  • काला उडद -१००ग्राम
  • पापड
  • नवग्रह बंडल
  • पितळ के टोप २
  • थाळी -१
  • कटोरी -२
  • गोबर कि कंडी-२
  • गोमूत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ ५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,कमल गट्टा ,गुगल ,बांस की टोकरी १ )


विशेष आहुती
  • शक्कर,कमल गट्टा
  • केला,शहद
  • गुगल,पान
  • सुपाडी,कमल फुल
  • लाचन्द,पिली सरसो
  • लाल फुल,बेलपत्र
  • राई,पालक
  • चांदी का त्रिशूल
  • सोना
  • चिरचिरी अपामार्ग
  • निंबू,गन्ना
  • कददु
  • नारियल,चावल
  • सफेद चंदन,सीताफल
  • पेडा
  • तीळ,धूप,हलवा
  • आवला,भोजपञ
  • गंगाजल,समुद्र फेन
  • सारियाली
  • काजल,हिंग,गुलाल,काला अबीर
  • लोहवान
  • केशर,कस्तुरी
  • चिरोजी,जायफळ,बेल
  • दाल कि पिठी
  • इंद्र जौ,धनुष बान
  • खीर
  • काली मिर्च,गुरुच
  • दही,अनार,घी
  • संतरा,पालक
  • कर्पूर,बरी,अनार का छिलका
  • इलायची,सर्वोश्नाधि,ऋतु फल
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

ॐ ह्लीं बंगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:

माता बंगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें माता पीताम्बरा भी कहते हैं। ये स्तम्भन की देवी हैं। सारे ब्रह्माण्ड की शक्ति मिल कर भी इनका मुकाबला नहीं कर सकती. शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से शत्रुओं का स्तम्भन होता है तथा जातक का जीवन निष्कंटक हो जाता है। किसी छोटे कार्य के लिए १०००० तथा असाध्य से लगाने वाले कार्य के लिए एक लाख मंत्र का जाप करना चाहिए। बंगलामुखी मंत्र के जाप से पूर्व बंगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए।

पूजा वस्तुओं /बंगलामुखी पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-७
  • कलश -७
  • रोली-५० ग्राम
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • अबीर-१००ग्राम
  • गुलाल-१००ग्राम
  • सिन्दूर-१००ग्राम
  • पीसी हल्दी-१०० ग्राम
  • सुपाडी बडी-१किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • घी-५किलो
  • कपुर-२०० ग्राम
  • गंगाजल
  • चावल-७किलो
  • गेंहू-१किलो
  • शक्कर-१किलो
  • शहद
  • ,दोना-२ बण्डल
  • लाल कपडा
  • सफेद कपडा
  • पिला कपडा
  • हरा कपडा
  • काला कपडा -१मीटर
  • माताजी के लिये वस्र
  • साडी ,ब्लाउज ,पेटीकोट
  • इत्र
  • शृंगार सामग्री
  • धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा ,रुमाल
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ११ ,कुर्ता ११ ,तौलिया ११ ,बनियान ११ ,रुमाल ११ , आसन ११ ,हल्दी कि माला ११



  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई
  • फुल
  • फुल माला- ५
  • तुलसी ,दुर्वा
  • बेलपत्र
  • आम का पत्ता
  • पान का पत्ता
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ-१ बण्डल
  • रुई-१ पैकेट
  • अगरबत्ती
  • माचिस
  • नारियल गट -१
  • काला उडद -१००ग्राम
  • पापड
  • नवग्रह बंडल
  • पितळ के टोप २
  • थाळी -१
  • कटोरी -२
  • गोबर कि कंडी-२
  • गोमूत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ ५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,कमल गट्टा ,गुगल ,बांस की टोकरी १ )


विशेष आहुती
  • शक्कर,कमल गट्टा
  • केला,शहद
  • गुगल,पान
  • सुपाडी,कमल फुल
  • लाचन्द,पिली सरसो
  • लाल फुल,बेलपत्र
  • राई,पालक
  • चांदी का त्रिशूल
  • सोना
  • चिरचिरी अपामार्ग
  • निंबू,गन्ना
  • कददु
  • नारियल,चावल
  • सफेद चंदन,सीताफल
  • पेडा
  • तीळ,धूप,हलवा
  • आवला,भोजपञ
  • गंगाजल,समुद्र फेन
  • सारियाली
  • काजल,हिंग,गुलाल,काला अबीर
  • लोहवान
  • केशर,कस्तुरी
  • चिरोजी,जायफळ,बेल
  • दाल कि पिठी
  • इंद्र जौ,धनुष बान
  • खीर
  • काली मिर्च,गुरुच
  • दही,अनार,घी
  • संतरा,पालक
  • कर्पूर,बरी,अनार का छिलका
  • इलायची,सर्वोश्नाधि,ऋतु फल
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

ॐ श्रीखण्ड-चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्। विलेपन मातेश्वरी चन्दनं प्रति-गृहयन्ताम्।।

यदि शत्रु निरंतर आप पर अभिचारिक कर्म कर रहा हो, निरंतर किसी न किसी रूप में आपको आर्थिक, मानसिक, सामाजिक, शारीरिक क्षति पहुंचा रहा हो और आपके भविष्य को चौपट कर रहा हो, तब भद्रकाली के इस स्वरूप, अर्थात विपरीत प्रत्यंगिरा का आश्रय लेना सर्वोत्तम उपाय है। जिस दिन से साधक इस महाविधा का प्रयोग आरम्भ करता है, उसी दिन से ही भगवती भद्र काली उसकी सुरक्षा करने लगती हैं और शत्रु द्वारा किये गये अभिचाारिक कर्म दोगुने वेग से उसी पर लौटकर अपना प्रहार करते हैं। इसके अतिरिक्त राजकीय बाधा, अरिष्ट ग्रह बाधा निवारण में तथा अपना खोया हुआ पद, आस्तित्व ओर गरिमा प्राप्ति में भी यह विद्या सर्वोत्तम मानी जाती है। साधक की आयु, यश तथा तेज की वृद्धि करने में भी यह विद्या बहुत उत्तम मानी जाती है।

पूजा वस्तुओं /प्रत्यंगिरा पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-७
  • कलश -७
  • रोली-५० ग्राम
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • अबीर-१००ग्राम
  • गुलाल-१००ग्राम
  • सिन्दूर-१००ग्राम
  • पीसी हल्दी-१०० ग्राम
  • सुपाडी बडी-१किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • घी-३किलो
  • कपुर-२०० ग्राम
  • गंगाजल
  • चावल-७किलो
  • गेंहू-१किलो
  • शक्कर-१किलो
  • शहद
  • ,दोना-२ बण्डल
  • लाल कपडा
  • सफेद कपडा
  • पिला कपडा
  • हरा कपड़ा
  • काला कपडा -१मीटर
  • माताजी के लिये वस्र
  • साडी ,ब्लाउज ,पेटीकोट
  • इत्र
  • शृंगार सामग्री
  • धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा ,रुमाल
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ११ ,कुर्ता ११ ,तौलिया ११ ,बनियान ११ ,रुमाल ११ , आसन ११ ,हल्दी कि माला ११



  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई
  • फुल
  • फुल माला- ५
  • तुलसी ,दुर्वा
  • बेलपत्र
  • आम का पत्ता
  • पान का पत्ता
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ-१ बण्डल
  • रुई-१ पैकेट
  • अगरबत्ती
  • माचिस
  • नारियल गट -१
  • काला उडद -१००ग्राम
  • पापड
  • नवग्रह बंडल
  • पितळ के टोप २
  • थाळी -१
  • कटोरी -२
  • गोबर कि कंडी-२
  • गोमूत्र
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ ५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,कमल गट्टा ,गुगल ,बांस की टोकरी १ )


विशेष आहुती
  • शक्कर,कमल गट्टा
  • केला,शहद
  • गुगल,पान
  • सुपाडी,कमल फुल
  • लाचन्द,पिली सरसो
  • लाल फुल,बेलपत्र
  • राई,पालक
  • चांदी का त्रिशूल
  • सोना
  • चिरचिरी अपामार्ग
  • निंबू,गन्ना
  • कददु
  • नारियल,चावल
  • सफेद चंदन,सीताफल
  • पेडा
  • तीळ,धूप,हलवा
  • आवला,भोजपञ
  • गंगाजल,समुद्र फेन
  • सारियाली
  • काजल,हिंग,गुलाल,काला अबीर
  • लोहवान
  • केशर,कस्तुरी
  • चिरोजी,जायफळ,बेल
  • दाल कि पिठी
  • इंद्र जौ,धनुष बान
  • खीर
  • काली मिर्च,गुरुच
  • दही,अनार,घी
  • संतरा,पालक
  • कर्पूर,बरी,अनार का छिलका
  • इलायची,सर्वोश्नाधि,ऋतु फल
  • घर का बर्तन :थाली ५,कटोरी ६,प्लेट ४,चम्मच ४,मग या बाल्टी १,चद्दर ,दरी ,आशण ,चाकू ,चौकी ५,पाटा ४

मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं । यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम् ॥

भागवत पुराण (Bhagvat Puran) इस कलिकाल में सभी वेद पुराण (ved puran) में हिन्दू समाज का सर्वाधिक आदरणीय पुराण है, सैकड़ों वर्षों से श्रीमद् भागवत कथा हिन्दू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक मर्यादाओं की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता आ रहा हैं। यह वैष्णव सम्प्रदाय का प्रमुख ग्रन्थ है। भागवत पुराण में वेदों, उपनिषदों तथा दर्शन शास्त्र के गूढ़ एवं रहस्यमय विषयों को अत्यन्त सरलता के साथ निरूपित किया गया है। इसे भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्वकोश कहना अधिक समीचीन होगा। श्रीमद् भागवत कथा में सकाम कर्म, निष्काम कर्म, ज्ञान साधना, सिद्धि साधना, भक्ति, अनुग्रह, मर्यादा, द्वैत-अद्वैत, द्वैताद्वैत, निर्गुण-सगुण तथा व्यक्त-अव्यक्त रहस्यों का समन्वय उपलब्ध होता है। ‘श्रीमद्भागवत पुराण’ वर्णन की विशदता और उदात्त काव्य-रमणीयता से ओतप्रोत है। यह विद्या का अक्षय भण्डार है। यह पुराण सभी प्रकार के कल्याण देने वाला तथा त्रय ताप-आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक आदि का शमन करता है। ज्ञान, भक्ति और वैरागय का यह महान ग्रन्थ है।

पुजा सामग्री /श्रीमद भागवत कथा

  • श्रीफळ-५
  • कलश तांबे के -५
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-१ किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-५किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -१ किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-२किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो



  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • हरा वस्त्र
  • काला वस्त्र
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • हवन सामग्री:(काला तिल-१किलो ,जौ -५००ग्राम ,हवन सामग्री -१किलो ,चन्दन पावडर १००ग्राम ,आम की लकडी-५किलो ,नवग्रह कि लकडी ,तांबडी ५ टोप पीतल के २,थाली १,कटोरी २,कांसे की कटोरी १,बांस की छाबडी १ )
  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • कमल गट्टा -१००ग्राम
  • देवतांओ के लिये:धोती ५ ,कुर्ता ५ ,तौलिया ५ ,बनियान ५ ,रुमाल ५ बडी,साडी ३,ब्लाउज ३
  • शमीपत्र
  • गुग्गल- २०० ग्राम
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी १ पाटा २
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चंद्रदर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये


    विशेष सामग्री

  • बांस की लकड़ी -१
  • सुवा/तोता
  • पितरो की फोटो
  • आसान वस्त्र
  • भागवत जी का वस्त्र
  • शुक देव जी का पोशाख
  • गद्दा ,तकिया
  • भागवत जी की मूल पुस्तक
  • दिन :-श्रीफल
  • द्वितीय दिन :-पद की सामग्री १३ वस्तु
  • तृतीय दिन :-वेश सहागद्धा
  • चतुर्थ दिन :-सिधा
  • विष्णु जी की सुवर्ण मूर्ति
  • पंचम दिन :-पोशाख ,पात्र ,कृष्ण जन्मोस्तव खिलौना ,बंधाई
  • षष्टम दिन :-चांदी के पात्र
  • सप्तम दिन :-गौदान,न्योछावरदान
  • हवन :-गीता पाठ ,विष्णु सहस्त्र नाम ,
  • भागवत जी की विदाई

ॐ गजाननं भूतगणादि सेवितंकपित्थ जम्बूफलचारु भच्छणम उमासुतं शोक विनाशकारकं मामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥

फैक्ट्री के पूजा को फैक्ट्री पूजन कहा जाता है। पहली बार फैक्ट्री लगाने के समय यह पूजा की जाती है । फैक्ट्री लगाने के लिए शुभ मुहूर्त का निर्धारण करने के लिए एक पंडित की सहायता लेना चाहिए। पंडित को ज्योतिषीय चार्ट और पंचांग की मदद से मुहूर्त का निर्धारण करना चाहिए ।

पूजा वस्तुओं / फैक्ट्री पूजा सामग्री

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम
  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी



  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी ५,पाटा ४
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चंद्रदर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

ॐ गजाननं भूतगणादि सेवितंकपित्थ जम्बूफलचारु भच्छणम उमासुतं शोक विनाशकारकं मामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥

कर्ण पाली के छेदन, जिसे कर्णवेध संस्कार के नाम से जाना जाता है १६ संस्कारों में एक प्रमुख संस्कार है। इसमें बच्चे के कान के निचले मांसल हिस्से में छेद किया जाता है जिससे बालक कान में कुंडल धारण कर सके। यह संस्कार हिन्दू सनातन मतावलम्बियों के बालको के जन्म से 3रे या 5वे वर्ष में किया जाता है। यह बाद के वर्षो में भी हो सकता है। पहले ये संस्कार सभी अलग अलग किये जाते थे। लेकिन आजकल बालक के जनेऊ संस्कार के समय ही एक साथ कई संस्कार कर दिए जाते हैं। जैसे चूड़ाकरण, कर्णवेध, यज्ञोपवीत, वेदारम्भ, शिखांत और सामवर्तन संस्कार ब्राम्हण बालक के यज्ञोपवीत संस्कार के समय ही कर दिया जाता है। आधुनिक पश्चिमी प्रभावों के कारण कर्णवेधन संस्कार पुरुषों के बीच समय के साथ एक असामान्य ("कम महत्व का") संस्कार बन गया है। कर्णवेधन संस्कार बाकि के और संस्कारों की तरह अभी भी किया जाना चाहिए। इसका भी अपना विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है।

पूजा वस्तुओं / कर्ण भेद संस्कार

  • श्रीफळ-२
  • कलश तांबे के -२
  • रोली-५० ग्राम
  • अबीर-५० ग्राम
  • गुलाल-५० ग्राम
  • सिन्दूर-५० ग्राम
  • पीसी हल्दी-५० ग्राम
  • कपुर-१०० ग्राम
  • केशर-१ ग्राम
  • मोली-२ बण्डल
  • जनेऊ यज्ञोपवीत-१५-नग
  • इत्र-२ शीशी
  • सुपाडी बडी-आधा किलो
  • लौग-५० ग्राम
  • इलायची-५० ग्राम
  • अगरबत्ती-१ पैकेट
  • कापुस-१ बण्डल
  • माचिस,दोना-२ बण्डल
  • पीली सरसो-१०० ग्राम



  • नारियलगट-१नग
  • अष्टगंध -१ डब्बी
  • चन्दन पावडर-१ डब्बी
  • गुड -१००ग्राम
  • चावल-१किलो
  • गेंहू -१किलो
  • शक्कर -आधा किलो
  • शहद -१शीशी
  • कच्चा दुध -५०० ग्राम
  • दही -२००ग्राम
  • घी-आधा किलो
  • मीठा तेल-अधाकिलो
  • डाभ -(कुश )
  • पंचमेवा-२५०ग्राम
  • लाल वस्र -सव्वा मीटर
  • सफेद वस्र -सव्वा मीटर
  • रेशमी वस्र -सव्वा मीटर
  • गणेश के लिये वस्र
  • धोती,कुर्ता


  • रुई बत्ती -१पॅकेट
  • चॉंदी के गणेश जी
  • ब्राम्हण वरण सामग्री :धोती ,बनियान ,कुर्ता ,गमछा
  • फल:५ प्रकार के
  • मिठाई:लड्डू पेढा अदि
  • आम का पत्ता,तोरण वंदनवार
  • पान का पत्ता :३१ नग
  • फुल माला :बडी २,छोटी ५
  • शमीपत्र
  • फुल १ किलो,तुलसी ,दुर्वा ,बेलपत्र
  • चौकी -१ ,पाटा -२
  • घर का बर्तन :थाली ३,कटोरी ३,प्लेट ४,चम्मच ४,गिलास ,चंदन चकला ,आसन ,चद्दर ,नॅपकिन ४,पाणी की बाल्टी ,टोप २ हाथ धोने के लीये

घी का अभिषेक

घी का अभिषेक

होली का पुजन

होली का पुजन

होली का पुजन

रुद्रा अभिषेक

रुद्रा अभिषेक

काल सरप योग पूजा त्रंबकेश्वर

काल सरप योग पूजा त्रंबकेश्वर

काल सरप योग पूजा त्रंबकेश्वर

काल सरप योग पूजा त्रंबकेश्वर

काल सरप योग पूजा त्रंबकेश्वर

छप्पन भोग पूजा

पार्थिव शिवलिंग पूजा

पार्थिव शिवलिंग पूजा

पार्थिव शिवलिंग पूजा

ग्रह प्रावेश पूजा

ग्रह प्रवेश पूजा

ग्रह प्रवेश पूजा

श्रावण अभिषेक पूजा

श्रावण अभिषेक पूजा

वास्तू पूजन

वास्तू पूजण

वास्तू पूजण

काल सरप योग पूजा त्रंबकेश्वर